Air India: एयर इंडिया का बड़ा फैसला, ईंधन की बढ़ती कीमतों के कारण रोजाना 100 उड़ानें कम करने की तैयारी, जानें किन रूटों पर पड़ेगा सबसे ज्यादा असर

Air India to Cut 100 Daily Flights: टाटा समूह के स्वामित्व वाली एयर इंडिया (Air India) ने जून 2026 से अपने घरेलू और अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क पर रोजाना लगभग 100 उड़ानों की कटौती करने की योजना बनाई है. विमानन ईंधन (ATF) की कीमतों में लगातार हो रही बढ़ोतरी और परिचालन लागत (Operating Costs) में इजाफे के कारण एयरलाइन ने यह कदम उठाने का फैसला किया है. वर्तमान में एयर इंडिया प्रतिदिन लगभग 1,100 उड़ानों का संचालन करती है, जिसमें अब करीब 10 प्रतिशत की कमी आने की संभावना है.

इन रूटों पर पड़ेगा सबसे ज्यादा असर

एयरलाइन के सूत्रों के अनुसार, उड़ान कटौती का सबसे बड़ा असर लंबी दूरी के अंतरराष्ट्रीय रूटों पर पड़ेगा. इनमें भारत से यूरोप, उत्तरी अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया और सिंगापुर जाने वाली उड़ानें शामिल हैं. दिल्ली और मुंबई से लंदन, पेरिस, न्यूयॉर्क, सैन फ्रांसिस्को और सिडनी जैसे प्रमुख शहरों के लिए उड़ानों की संख्या कम की जा सकती है. ईंधन की खपत अधिक होने के कारण इन रूटों पर परिचालन करना अब आर्थिक रूप से चुनौतीपूर्ण हो गया है.  यह भी पढ़े:  Jet Fuel Price Hike: विमान किराया महंगा होने की आशंका, अंतरराष्ट्रीय एयरलाइंस के जेट फ्यूल में 5% की बढ़ोतरी; लगातार दूसरे महीने दाम बढ़े

एटीएफ की कीमतों में भारी उछाल

जेट ईंधन (ATF) की कीमतों में आई हालिया तेजी ने विमानन क्षेत्र की चिंताएं बढ़ा दी हैं. 1 मई 2026 को अंतरराष्ट्रीय परिचालन के लिए एटीएफ की कीमतों में 5 प्रतिशत की बढ़ोतरी की गई है, जो लगातार दूसरी मासिक वृद्धि है. दिल्ली में अंतरराष्ट्रीय उड़ानों के लिए ईंधन की कीमत अब 1,511.86 डॉलर प्रति किलोलीटर तक पहुंच गई है. हालांकि, घरेलू उड़ानों के लिए कीमतों में फिलहाल कोई बदलाव नहीं हुआ है, लेकिन अप्रैल में इनमें 25 प्रतिशत की बड़ी बढ़ोतरी देखी गई थी.

परिचालन लागत और जियोपॉलिटिकल चुनौतियां

एयरलाइन के कुल खर्च का करीब 40 प्रतिशत हिस्सा अकेले ईंधन पर खर्च होता है. इसके अलावा, पाकिस्तानी हवाई क्षेत्र (Airspace) के बंद होने और वैश्विक संघर्षों के कारण उड़ानों को लंबे रूट लेने पड़ रहे हैं. लंबी दूरी की उड़ानों को अब वियना या स्टॉकहोम जैसे शहरों में तकनीकी ठहराव (Technical Halt) करना पड़ता है, जिससे ईंधन की खपत और चालक दल (Crew) का खर्च दोनों बढ़ गए हैं.

यात्रियों के लिए बढ़ सकती हैं मुश्किलें

फेडरेशन ऑफ इंडियन एयरलाइंस (FIA) ने संकेत दिए हैं कि यदि सरकार ने करों में राहत नहीं दी, तो अन्य एयरलाइंस भी उड़ानों में कटौती कर सकती हैं. यात्रियों के लिए इसका सीधा मतलब है—कम विकल्प और टिकट की कीमतों में बढ़ोतरी. उड़ानों की संख्या घटने से मांग और आपूर्ति का संतुलन बिगड़ सकता है, जिससे आगामी पीक ट्रैवल सीजन में हवाई सफर और महंगा हो सकता है.

 एयर इंडिया का वित्तीय संघर्ष

टाटा संस और सिंगापुर एयरलाइंस द्वारा समर्थित होने के बावजूद, एयर इंडिया भारी वित्तीय दबाव में है. वित्त वर्ष 2026 में एयरलाइन का घाटा 20,000 करोड़ रुपये से अधिक होने का अनुमान है. ऐसे में नेटवर्क को छोटा करना और केवल मुनाफे वाले रूटों पर ध्यान देना कंपनी की मजबूरी बन गया है. विशेषज्ञों का मानना है कि वैश्विक ऊर्जा बाजार में अस्थिरता बनी रहने तक विमानन क्षेत्र में ऐसी चुनौतियां बरकरार रहेंगी.