देहरादून: उत्तराखंड की राजधानी देहरादून (Dehradun) में हुई भारी बारिश ने चारों ओर तबाही मचा दी है. मूसलाधार बारिश के बाद मंदिर और घर पानी में डूब गए, 100 मीटर लंबी सड़क बह गई और तामसा नदी उफान पर आ गई. रातभर की बारिश के बाद आई बाढ़ और मलबे के दृश्य डर पैदा कर रहे हैं. इस घटना ने एक बार फिर याद दिलाया कि जलवायु परिवर्तन (Climate Change) अब केवल किताबों का विषय नहीं, बल्कि जमीनी हकीकत है.
भारतीय मौसम विभाग (IMD) देहरादून के प्रमुख डॉ. चंदर सिंह तोमर ने कहा, सोमवार रात की बारिश को क्लाउडबर्स्ट नहीं कहा जा सकता. क्लाउडबर्स्ट की परिभाषा के मुताबिक, एक घंटे में 100 मिमी या उससे अधिक बारिश को क्लाउडबर्स्ट माना जाता है, जबकि देहरादून में 67 मिमी प्रति घंटे बारिश दर्ज की गई. हालांकि, उन्होंने इसे अत्यधिक तीव्र वर्षा (Extreme Intense Rain) बताया और पहले से जारी भारी बारिश अलर्ट का जिक्र किया, जो 17 सितंबर की सुबह तक लागू रहेगा.
हवा के पैटर्न का टकराव बना भारी बारिश का कारण
डॉ. तोमर ने समझाया कि पूर्वी हवाएं (Easterlies) और पश्चिमी हवाएं (Westerlies) जब टकराती हैं, तो इससे हवा के द्रव्यमान में अस्थिरता पैदा होती है, जो भारी वर्षा का कारण बनती है. मौसम विभाग के मुताबिक, देहरादून, नैनीताल और चंपावत में बहुत भारी बारिश की संभावना है, जबकि चमोली, ऊधमसिंह नगर, बागेश्वर और पिथौरागढ़ में भी भारी वर्षा की चेतावनी दी गई है.
औसत से 22% ज्यादा बारिश
आईएमडी डेटा के अनुसार, उत्तराखंड में जून 1 से अब तक 1343.2 मिमी बारिश हो चुकी है, जबकि सामान्य औसत 1103.2 मिमी है. यानी 22% ज्यादा. बागेश्वर ज़िले में यह 239% तक पहुंच गया है. मौसम विभाग के मुताबिक, मानसून के उतार-चढ़ाव सामान्य हैं, लेकिन विशेषज्ञ इसे हल्के में नहीं ले रहे.
जलवायु परिवर्तन है जिम्मेदार
एचएनबी गढ़वाल विश्वविद्यालय के पूर्व विभागाध्यक्ष और भू-विज्ञान के प्रोफेसर डॉ. यशपाल सुंदरियाल का मानना है कि यह बदलाव जलवायु परिवर्तन का नतीजा है. उन्होंने कहा कि अलग-अलग वायु द्रव्यमान, ठंडी, गर्म और अवरोधित आपस में मिलकर ट्रिपल जंक्शन बना रहे हैं, जिससे तेज हवाओं और भारी बारिश जैसी चरम घटनाएं बढ़ रही हैं.
बारिश का पैटर्न बदल रहा है, बढ़ रहा है खतरा
डॉ. सुंदरियाल ने बताया कि अब उतनी ही मात्रा की बारिश, जो पहले चार-पांच दिनों में होती थी, एक ही दिन या कुछ घंटों में हो रही है. इससे फ्लैश फ्लड, भूस्खलन और बाढ़ जैसी आपदाओं का खतरा बढ़ रहा है. उन्होंने यह भी जोड़ा कि जंगलों की आग से निकलने वाला ब्लैक कार्बन और नाभिकीय कण बादलों के साथ मिलकर भीषण बारिश का कारण बन सकते हैं.
देहरादून की यह घटना प्रकृति की चेतावनी है. जलवायु परिवर्तन के बढ़ते प्रभाव, तेज हवाओं के पैटर्न और बदलते मानसून चक्र हमें बताते हैं कि आने वाले समय में ऐसी घटनाएं और भी आम हो सकती हैं. समय रहते सतर्कता, उचित योजना और पर्यावरण संरक्षण ही हमें इन आपदाओं से बचा सकते हैं.










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