इलेक्ट्रिक कार निर्माण को बढ़ावा देने के लिए SPMEPCI योजना के तहत पोर्टल लॉन्च, 21 अक्टूबर 2025 तक किया जा सकता है आवेदन
Electric Vehicle

देश में इलेक्ट्रिक वाहनों (EVs) के निर्माण को बढ़ावा देने के लिए भारत सरकार ने एक अहम कदम उठाया है. मंगलवार को केंद्र सरकार ने ‘भारत में इलेक्ट्रिक यात्री कारों के निर्माण को बढ़ावा देने की योजना’ (SPMEPCI) के तहत आवेदन प्रक्रिया के लिए पोर्टल लॉन्च कर दिया है. केंद्रीय उद्योग मंत्री एच. डी. कुमारस्वामी ने जानकारी दी है, कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में यह योजना भारत को स्वच्छ, आत्मनिर्भर और भविष्य के लिए तैयार मोबिलिटी सिस्टम (Mobility System) की ओर ले जाने वाला एक ऐतिहासिक कदम है.

इस योजना के मुख्य उद्देश्य

भारत सरकार ने इलेक्ट्रिक कारों के निर्माण को बढ़ावा देने के लिए एक खास योजना शुरू की है. इस योजना का मुख्य उद्देश्य देश में ज्यादा से ज्यादा इलेक्ट्रिक गाड़ियाँ बनाना है, जिससे हमारा देश प्रदूषण को कम करके एक स्वच्छ भविष्य की ओर बढ़ सके. सरकार चाहती है, कि भारत आने वाले समय में पूरी दुनिया के लिए इलेक्ट्रिक गाड़ियाँ बनाने का एक बड़ा केंद्र बने.

इस योजना के ज़रिए भारत 2070 तक ‘नेट ज़ीरो’ (Net Zero) उत्सर्जन यानी पर्यावरण को नुकसान पहुँचाने वाला गैसों का उत्सर्जन पूरी तरह से बंद करने का लक्ष्य लेकर चल रहा है. इसके लिए सरकार विदेशी कंपनियों को भी भारत में निवेश करने के लिए आकर्षित कर रही है, जिससे नई तकनीक आए और हमारा देश आत्मनिर्भर बने.

यह भी पढ़े-EPFO ने ऑटो सेटलमेंट की सीमा 1 लाख से बढ़ाकर 5 लाख रुपये की, सिर्फ 3 दिन में ट्रांसफर होगा पैसा

इस पहल के साथ सरकार का मकसद ‘मेक इन इंडिया’ (Make In India) को आगे बढ़ाना है, जिससे देश में ही गाड़ियों का निर्माण हो और ज्यादा से ज्यादा लोगों को रोज़गार के अवसर मिलें. इससे देश की अर्थव्यवस्था मजबूत होगी और युवाओं को काम के नए मौके मिलेंगे.

आवेदन कैसे करें?

जो कंपनियाँ इस योजना का फायदा उठाना चाहती हैं, वह सरकार द्वारा शुरू किए गए पोर्टल spmepci.heavyindustries.gov.in पर जाकर ऑनलाइन आवेदन कर सकती हैं. आवेदन करने की प्रक्रिया 24 जून 2025 से शुरू हो चुकी है, और कंपनियाँ अपना आवेदन 21 अक्टूबर 2025 तक जमा कर सकती हैं. यह एक शानदार मौका है, उन कंपनियों के लिए जो भारत में इलेक्ट्रिक गाड़ियों के निर्माण में निवेश करना चाहती हैं.

कंपनियों को मिलने वाली सुविधाएँ

जो कंपनियाँ इस योजना के तहत चयनित होंगी, उन्हें कुछ खास सुविधाएँ मिलेंगी. वह विदेशी बाजारों से पूरी तरह तैयार इलेक्ट्रिक कारें (CBUs) भारत में आयात कर सकेंगी, लेकिन एक शर्त होगी कि उन गाड़ियों की न्यूनतम कीमत (CIF वैल्यू) $35,000 होनी चाहिए. इन गाड़ियों पर कंपनियों को केवल 15% कस्टम ड्यूटी देनी होगी, जबकि सामान्य तौर पर यह दर काफी ज्यादा होती है. यह छूट कंपनियों को 5 साल तक दी जाएगी.

हालाँकि इस योजना का लाभ उठाने के लिए कंपनियों को भारत में कम से कम 4,150 करोड़ रुपये का निवेश करना जरूरी होगा. इसका मकसद देश में निर्माण को बढ़ावा देना और स्थानीय उद्योगों को मजबूत बनाना है.

देश में निर्माण और तकनीक को बढ़ावा

इस स्कीम का मकसद यह है, कि भारत को दुनिया भर में इलेक्ट्रिक वाहनों के निर्माण का एक बड़ा केंद्र बनाया जाए. इसके लिए सरकार ने यह भी तय किया है, कि गाड़ियों में इस्तेमाल होने वाले कुछ पार्ट्स देश में ही बनने चाहिए. इसे डोमेस्टिक वैल्यू एडिशन (DVA) कहा जाता है, यानी गाड़ी के कुछ हिस्से भारत में तैयार हों, ताकि हमारे स्थानीय उद्योग और कंपनियों को भी फायदा मिले.

इससे न सिर्फ नई-नई तकनीकें भारत में आएंगी, बल्कि यहाँ की कंपनियों को भी उन्हें सीखने और इस्तेमाल करने का मौका मिलेगा. इसके साथ ही देश की निर्माण क्षमता बढ़ेगी और ‘मेक इन इंडिया’ जैसे अभियानों को मजबूती मिलेगी.