Government Bans Cough Syrups: 2 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए कफ सिरप पर प्रतिबंध, जारी हुई नई गाइडलाइंस
भारत सरकार ने बच्चों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए 2 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए कफ सिरप के इस्तेमाल पर रोक लगा दी है. स्वास्थ्य नियामक ने दवा कंपनियों को लेबल पर स्पष्ट चेतावनी लिखने के निर्देश दिए हैं.
भारत सरकार ने देश में बच्चों के स्वास्थ्य की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है. केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन (CDSCO) ने 2 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए सर्दी-खांसी की दवाओं (कफ सिरप) के इस्तेमाल पर प्रतिबंध लगा दिया है. स्वास्थ्य विशेषज्ञों की सिफारिशों के बाद लिए गए इस फैसले के तहत अब दवा कंपनियों को अपने उत्पादों पर अनिवार्य रूप से चेतावनी लिखनी होगी कि यह दवा छोटे बच्चों के लिए नहीं है.
दवा कंपनियों के लिए नए निर्देश
सरकार ने ड्रग कंट्रोलर जनरल ऑफ इंडिया (DCGI) के माध्यम से सभी राज्यों के ड्रग कंट्रोलर्स और दवा निर्माताओं को नोटिस जारी किया है. इस निर्देश के अनुसार, फिक्स्ड डोज कॉम्बिनेशन (FDC) वाली सर्दी-खांसी की दवाओं के लेबल पर स्पष्ट रूप से लिखना होगा कि '2 साल से कम उम्र के बच्चों में इसका उपयोग न करें'. यह आदेश तत्काल प्रभाव से लागू करने को कहा गया है ताकि किसी भी अनहोनी से बचा जा सके.
क्यों लिया गया यह फैसला?
यह निर्णय वैश्विक स्तर पर बच्चों में कफ सिरप के प्रतिकूल प्रभावों की बढ़ती घटनाओं को देखते हुए लिया गया है. स्वास्थ्य मंत्रालय के तहत गठित एक विशेषज्ञ समिति ने सुझाव दिया था कि 2 साल से कम उम्र के बच्चों में कफ सिरप का उपयोग उनके श्वसन तंत्र और मानसिक स्वास्थ्य पर बुरा असर डाल सकता है. कई मामलों में इन दवाओं के कारण बच्चों में गंभीर स्वास्थ्य जटिलताएं देखी गई थीं, जिसके बाद नियामक ने कड़ा रुख अपनाया है.
स्वास्थ्य विशेषज्ञों की राय
डॉक्टरों और बाल रोग विशेषज्ञों ने सरकार के इस कदम का स्वागत किया है. विशेषज्ञों का मानना है कि छोटे बच्चों में सर्दी और खांसी अक्सर वायरल होती है, जो उचित देखभाल और घरेलू उपचार से ठीक हो सकती है. बिना डॉक्टरी सलाह के कफ सिरप देना बच्चों के लिए जानलेवा साबित हो सकता है. नई गाइडलाइंस के बाद अब फार्मासिस्ट और माता-पिता को भी दवाओं के चयन में अधिक सावधानी बरतनी होगी.
पृष्ठभूमि और वैश्विक संदर्भ
पिछले कुछ समय में भारतीय निर्मित कफ सिरप को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी चिंताएं जताई गई थीं. विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने भी समय-समय पर छोटे बच्चों को बिना नियमन वाली दवाएं देने के खतरों के प्रति आगाह किया है. भारत सरकार का यह ताजा फैसला न केवल घरेलू स्तर पर स्वास्थ्य सुरक्षा मानकों को मजबूत करेगा, बल्कि वैश्विक स्तर पर भारतीय फार्मा क्षेत्र की विश्वसनीयता भी बढ़ाएगा.
(The above story first appeared on LatestLY on Apr 12, 2026 10:31 AM IST. For more news and updates on politics, world, sports, entertainment and lifestyle, log on to our website latestly.com).

