दवाओं की कीमतों पर निगरानी रखने वाली सरकारी संस्था नेशनल फार्मास्युटिकल प्राइसिंग अथॉरिटी (NPPA) ने एक बड़ा फैसला लिया है. प्राधिकरण ने ड्रग्स प्राइसेज कंट्रोल ऑर्डर (DPCO), 2013 के प्रावधानों के तहत कुल 30 नए दवा फॉर्मूलेशन की खुदरा कीमतें (Retail Prices) निर्धारित कर दी हैं. इस कदम का मुख्य उद्देश्य आम जनता के लिए आवश्यक और जीवन रक्षक दवाओं को किफायती और सुलभ बनाना है.
इन जरूरी दवाओं की कीमतें हुईं तय
अथॉरिटी द्वारा जारी आधिकारिक अधिसूचना के अनुसार, जिन 30 दवाओं की खुदरा कीमतें तय की गई हैं, उनमें दैनिक स्वास्थ्य और पोषण से जुड़े कई महत्वपूर्ण फॉर्मूलेशन शामिल हैं. इनमें मुख्य रूप से शामिल हैं:
दवाइयों के दाम पर NPPA का बड़ा फैसला
नेशनल फार्मास्युटिकल प्राइसिंग अथॉरिटी ने 30 दवाइयों के फॉर्मूलेशन की रिटेल कीमत तय कर दी है, जिसमें विटामिन D3 ओरल सॉल्यूशन, कैल्शियम, विटामिन D3, मिथाइलकोबालामिन, L-मिथाइलफोलेट कैल्शियम, पाइरिडोक्सल-5 फॉस्फेट और दूसरी दवाएं शामिल हैं। pic.twitter.com/n2VmyTs9Kk
— ANI_HindiNews (@AHindinews) May 31, 2026
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विटामिन D3 ओरल सॉल्यूशन (Vitamin D3 Oral Solution)
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कैल्शियम और विटामिन D3 कॉम्बिनेशन
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मिथाइलकोबालामिन (Methylcobalamin)
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L-मिथाइलफोलेट कैल्शियम (L-Methylfolate Calcium)
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पाइरिडोक्सल-5 फॉस्फेट (Pyridoxal-5 Phosphate)
इनके अलावा कुछ अन्य एंटी-डायबिटिक, एंटी-हाइपरटेंसिव (ब्लड प्रेशर) और दर्द निवारक दवाओं के नए कॉम्बिनेशन की कीमतें भी नियंत्रित की गई हैं.
क्या है कीमत तय करने का आधार?
एनपीपीए की हालिया बैठक में अलग-अलग दवा निर्माता कंपनियों द्वारा जमा किए गए आवेदनों पर विचार करने के बाद यह निर्णय लिया गया है. नियमों के मुताबिक, जब भी कोई मौजूदा दवा निर्माता कंपनी 'नेशनल लिस्ट ऑफ एसेंशियल मेडिसिंस' (NLEM) में शामिल किसी सॉल्ट को किसी अन्य साल्ट के साथ मिलाकर नया फॉर्मूलेशन या डोज तैयार करती है, तो उसकी कीमत तय करने का अधिकार एनपीपीए के पास होता है. इसी प्रक्रिया के तहत सन फार्मास्युटिकल्स जैसी प्रमुख कंपनियों के न्यूट्रिशनल कॉम्बिनेशन की अधिकतम खुदरा दरें तय की गई हैं.
आदेश का उल्लंघन करने पर होगी सख्त कार्रवाई
सरकार ने साफ किया है कि सभी दवा निर्माता और मार्केटिंग कंपनियों को इन तय कीमतों का सख्ती से पालन करना होगा. इस अधिसूचना में शामिल दरों से अधिक कीमत वसूलने वाली कंपनियों को नियमों के उल्लंघन का दोषी माना जाएगा. अगर कोई कंपनी तय कीमत से ज्यादा पैसे वसूलती है, तो उसे वसूली गई अतिरिक्त राशि (Overcharged Amount) पर ब्याज सहित जुर्माना देकर सरकारी खजाने में जमा कराना होगा.













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