Uttarakhand: जोड़ मेले में टला बड़ा हादसा, SDRF ने 50 से अधिक श्रद्धालुओं को सुरक्षित बचाया

Uttarakhand: उत्तराखंड के चंपावत जिले में आयोजित प्रसिद्ध जोड़ मेले के दौरान रविवार को एक बड़ा हादसा टल गया. गुरुद्वारा श्री रीठा साहिब में आयोजित तीन दिवसीय मेले में शामिल होने पहुंचे 50 से अधिक श्रद्धालु अचानक नदी का जलस्तर बढ़ने से फंस गए, लेकिन राज्य आपदा प्रतिवादन बल (SDRF) की तत्परता और सूझबूझ से सभी को सुरक्षित बचा लिया गया. यह घटना ऐतिहासिक श्री रीठा साहिब गुरुद्वारा परिसर के पास हुई, जहां गुरु नानक देव जी की ऐतिहासिक यात्रा की स्मृति में हर वर्ष जोड़ मेले का आयोजन किया जाता है. इस मेले में औसतन दो लाख श्रद्धालु शामिल होते हैं. Uttarakhand Announces ‘No Vehicle Day’: उत्तराखंड में ‘नो व्हीकल डे’ का ऐलान, सीएम काफिले में 50 फीसदी कटौती और वर्क फ्रॉम होम को बढ़ावा

रविवार को बड़ी संख्या में श्रद्धालु गुरुद्वारे में मत्था टेकने से पहले लधिया और रतिया नदियों के संगम क्षेत्र में स्नान कर रहे थे. इसी दौरान क्षेत्र में हुई भारी बारिश के कारण नदी का जलस्तर अचानक बढ़ गया. देखते ही देखते तेज बहाव ने वहां मौजूद श्रद्धालुओं को घेर लिया और अफरा-तफरी का माहौल बन गया. प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, 50 से 60 श्रद्धालु जान बचाने के लिए नदी के बीच स्थित एक छोटे ढांचे का सहारा लेकर खड़े हो गए. सूचना मिलते ही एसडीआरएफ की टीम तुरंत मौके पर पहुंची और राहत एवं बचाव अभियान शुरू किया.

एसडीआरएफ जवानों ने साहस, धैर्य और पेशेवर कौशल का परिचय देते हुए सभी फंसे श्रद्धालुओं को सुरक्षित बाहर निकाला. अभियान के दौरान किसी भी श्रद्धालु को चोट नहीं आई और सभी को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाया गया. नदी के बढ़ते जलस्तर के कारण कई वाहन भी नदी तल क्षेत्र में फंस गए थे. एसडीआरएफ टीम ने स्थिति का आकलन करते हुए उन वाहनों को भी सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाने में मदद की.

घटना की जानकारी मिलते ही स्थानीय पुलिस और यातायात पुलिस भी मौके पर पहुंच गई. प्रशासन ने दोनों ओर बैरिकेडिंग कर लोगों की आवाजाही नियंत्रित की और अन्य श्रद्धालुओं को नदी क्षेत्र में जाने से रोक दिया. एसडीआरएफ, पुलिस और जिला प्रशासन के संयुक्त प्रयासों से सभी फंसे हुए लोगों को सुरक्षित बचा लिया गया और किसी प्रकार की जनहानि नहीं हुई.

एसडीआरएफ के कमांडेंट अरपण यदुवंशी ने बताया कि मेले में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं की मौजूदगी, संवेदनशील मौसम और संभावित खतरों को देखते हुए एसडीआरएफ की टीम को पहले से ही तैनात किया गया था. यही दूरदर्शिता और सतर्कता इस आपदा जैसी स्थिति में बेहद कारगर साबित हुई. उन्होंने बचाव अभियान में शामिल सभी कर्मियों की सराहना करते हुए कहा कि एसडीआरएफ का उद्देश्य आपात परिस्थितियों में त्वरित और प्रभावी सहायता उपलब्ध कराना है, ताकि लोगों की जान-माल की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके.