NDA की पासिंग आउट परेड में पहली बार 17 महिला कैडेट्स ने लिया हिस्सा, 3 साल की मेहनत के बाद बनीं सफल अधिकारी

नई दिल्ली: इतिहास रचते हुए इस बार नेशनल डिफेंस एकेडमी (NDA) की पासिंग आउट परेड में पहली बार 17 महिला कैडेट्स ने भाग लिया. ये महिलाएं 2022 में NDA में शामिल हुई थीं, जब सुप्रीम कोर्ट के आदेश से महिलाओं को तीनों सेनाओं की इस एकेडमी में दाखिला मिलने लगा.

इन महिला कैडेट्स ने 300 से ज्यादा पुरुष कैडेट्स के साथ परेड में कंधे से कंधा मिलाकर मार्च किया. इस परेड में डिवीजन कैडेट कप्तान श्रुति दक्ष ने आर्ट्स स्ट्रीम में सबसे ज्यादा रैंक हासिल की. वहीं, कैडेट लकी कुमार, बटालियन कैडेट कप्तान प्रिंस कुमार सिंह कुशवाहा और कैडेट कप्तान उदयवीर सिंह ने साइंस, कंप्यूटर साइंस और बी.टेक स्ट्रीम में टॉप किया.

श्रीमती दक्ष ने बताया, “यहां तीन साल की ट्रेनिंग काफी भावनाओं से भरी रही. शुरू में थोड़ा मुश्किल था लेकिन धीरे-धीरे मैं अकादमी में ढल गई, जोकि प्रशिक्षकों और स्टाफ की मदद से संभव हुआ. मेरे पिता भी NDA के पूर्व कैडेट हैं और मैं उसी हंटर स्क्वाड्रन से हूँ. मैं अपने परिवार की विरासत को आगे बढ़ा रही हूं.”

प्रिंस कुशवाहा ने कहा कि तीन साल की ट्रेनिंग में उन्हें कई जीवन के महत्वपूर्ण सबक मिले. उन्होंने कहा कि जब से महिलाओं को एडमिशन मिला है, अकादमी पुरुष प्रधान से एक पूरी तरह एकीकृत संस्था बन गई है. उन्होंने बताया- “हमने अकादमी को चाँद से सूरज बनने का सफर देखा है,”

कैडेट लकी कुमार ने बताया कि उन्हें अकादमी में तैराकी, हॉकी और घुड़सवारी जैसी कई चीजें सीखने को मिलीं. “यहां आने से पहले मुझे हॉकी खेलना नहीं आता था, लेकिन आखिरी साल तक मैं हॉकी टीम का कप्तान बन गया और हमने ट्रॉफी भी जीती.”

इस साल के NDA के 148वें कोर्स की पासिंग आउट परेड पुणे के NDA कैंपस में हुई. परेड के निरीक्षक जनरल डॉ. विजय कुमार सिंह थे, जो मिजोरम के राज्यपाल और पूर्व सेना प्रमुख भी हैं. पासिंग आउट के बाद कैडेट्स अपनी-अपनी सेवा शाखाओं की अगली ट्रेनिंग के लिए अलग-अलग अकादमियों में जाएंगे — सेना के लिए देहरादून की इंडियन मिलिट्री अकादमी, नौसेना के लिए एझिमाला की इंडियन नेवल अकादमी और वायुसेना के लिए दंडिगल की एयर फोर्स अकादमी.

2022 से अब तक NDA में कुल 126 महिला कैडेट्स छह बैचों में शामिल हो चुकी हैं. इनमें से पांच ने अब तक इस्तीफा दिया है. NDA का कहना है कि ट्रेनिंग ज्यादातर जेंडर न्यूट्रल रहती है, लेकिन कुछ खास ड्रिल्स महिलाओं के शारीरिक अंतर को ध्यान में रखकर थोड़ी अलग की जाती हैं.