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‘Langdi’ Dies: मध्य प्रदेश के पेंच टाइगर रिजर्व की प्रसिद्ध बाघिन टी-20, 'लंगड़ी' का निधन, 18 साल की उम्र में ली अंतिम सांस

पेंच टाइगर रिजर्व की प्रसिद्ध बाघिन टी-20, जिसे 'लंगड़ी' के नाम से जाना जाता था, का 18 वर्ष की आयु में निधन हो गया है. प्राकृतिक कारणों से हुई इस मृत्यु के साथ ही पेंच के एक गौरवशाली युग का अंत हो गया है.

‘Langdi’ Dies: मध्य प्रदेश के पेंच टाइगर रिजर्व की प्रसिद्ध बाघिन टी-20,  'लंगड़ी' का निधन, 18 साल की उम्र में ली अंतिम सांस
(Photo Credits: X/@PenchMP)

 मध्य प्रदेश के प्रसिद्ध पेंच टाइगर रिजर्व (PTR) से एक दुखद खबर सामने आई है. रिजर्व की सबसे उम्रदराज और लोकप्रिय बाघिनों में से एक, टी-20 (T-20), जिसे 'लंगड़ी' के नाम से जाना जाता था, शनिवार, 7 मार्च 2026 को मृत पाई गई. 18 वर्षीय इस बाघिन का शव सुबह करीब 10:30 बजे कर्माझिरी रेंज में मिला. शुरुआती जांच के अनुसार, बाघिन की मृत्यु उम्र संबंधी प्राकृतिक कारणों से हुई है.

18 वर्षों का सफर और पहचान

बाघिन टी-20 का जन्म साल 2008 में हुआ था और वह लगभग दो दशकों तक पेंच के पारिस्थितिकी तंत्र का एक महत्वपूर्ण हिस्सा रही. चलने के तरीके में हल्के लंगड़ापन के कारण पर्यटकों और वन विभाग के कर्मचारियों ने उसे 'लंगड़ी' नाम दिया था. अपनी शारीरिक चुनौती के बावजूद, वह एक कुशल शिकारी और एक सफल माँ साबित हुई. उसे आखिरी बार 6 मार्च को गश्ती दल ने देखा था, उस समय वह कमजोर लेकिन सक्रिय नजर आ रही थी.  यह भी पढ़े:  Viral Video: आराम फरमा रही बाघिन पर चढ़कर मस्ती करने लगे शावक, मां के साथ बच्चों की अटेखिलियों ने जीता दिल

लंगड़ी का निधन

10 शावकों की माँ और 'लेजेंड' का खिताब

बाघिन टी-20 ने अपने जीवनकाल में चार बार में कुल 10 शावकों को जन्म दिया. कर्माझिरी रेंज में बाघों की आबादी बढ़ाने में उसका विशेष योगदान रहा. वन अधिकारियों के अनुसार, जंगली बाघों की औसत आयु आमतौर पर 12 से 15 वर्ष होती है, लेकिन टी-20 का 18 साल तक जीवित रहना पेंच के सुरक्षित वातावरण और बेहतर प्रबंधन का प्रमाण है.

पोस्टमार्टम और प्रोटोकॉल

राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (NTCA) के प्रोटोकॉल के तहत, वरिष्ठ वन अधिकारियों और डॉक्टरों की एक टीम ने घटनास्थल का निरीक्षण किया. जांच में बाघिन के नाखून, दांत और शरीर के सभी अंग सुरक्षित पाए गए, जिससे शिकार (Poaching) की किसी भी आशंका को खारिज कर दिया गया है. पोस्टमार्टम के बाद, वन क्षेत्र में ही उसका अंतिम संस्कार कर दिया गया.

पेंच टाइगर रिजर्व का महत्व

मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र की सीमा पर फैला पेंच टाइगर रिजर्व अपने उच्च बाघ घनत्व के लिए जाना जाता है. यह वही जंगल है जिसने रुडयार्ड किपलिंग को 'द जंगल बुक' लिखने के लिए प्रेरित किया था. इससे पहले साल 2022 में पेंच की मशहूर बाघिन 'कॉलरवाली' का भी निधन हुआ था. टी-20 के जाने के बाद अब पार्क प्रबंधन उसके द्वारा छोड़े गए क्षेत्र की निगरानी कर रहा है, ताकि नई पीढ़ी के बाघ सुरक्षित रूप से उस क्षेत्र में अपनी जगह बना सकें.

(The above story first appeared on LatestLY on Mar 08, 2026 04:05 PM IST. For more news and updates on politics, world, sports, entertainment and lifestyle, log on to our website latestly.com).