Madhya Pradesh: महिलाओं के बीच पैठ जमाने की कोशिश में CM शिवराज, ये है रणनीति
मध्य प्रदेश की आधी आबादी पर मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान की खास नजर है और इस वर्ग के लिए नई योजनाओं की शुरुआत के साथ उनके मान, सम्मान और सुरक्षा का भरोसा दिलाकर मुख्यमंत्री इस वर्ग के बीच अपनी पैठ को और मजबूत बनाना चाह रहे हैं.
भोपाल, 12 जनवरी : मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) की आधी आबादी पर मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान (Shivraj Singh Chauhan) की खास नजर है और इस वर्ग के लिए नई योजनाओं की शुरुआत के साथ उनके मान, सम्मान और सुरक्षा का भरोसा दिलाकर मुख्यमंत्री इस वर्ग के बीच अपनी पैठ को और मजबूत बनाना चाह रहे हैं. मुख्यमंत्री चौहान के हाथों में चौथी बार राज्य की कमान है. बीते तीन कार्यकाल में चौहान ने लाड़ली लक्ष्मी योजना, कन्यादान विवाह योजना, साइकिल योजना जैसी अनेक योजनाओं को अमली जामा पहनाया था, वहीं नगरीय निकाय और पंचायतों के चुनाव में महिलाओं को 50 फीसदी आरक्षण दिया. यही कारण रहा कि उनकी पहचान राज्य की लड़़कियों के बीच मामा और महिलाओं के बीच भाई की छवि बन गई थी. इसकी ब्रांडिंग में तत्कालीन सरकार भी पीछे नहीं रही थी.
चौथी बार सत्ता में आने के बाद चौहान पिछले कार्यकाल में बनाई गई योजनाओं से आगे निकलकर आधी आबादी को नए तरीके से लुभाने में कोई कसर नहीं छोड़ रहे हैं. चौहान ने काम की तलाश में जाने वाली बालिकाओं के पंजीयन की व्यवस्था किए जाने के संकेत दिए हैं. इसके लिए वे अधिकारियों के साथ बैठक भी कर चुके हैं. इसकी वजह यह है कि राज्य के विभिन्न स्थानों से युवतियां काम की तलाश में बाहर जाती हैं और उनमें से बड़ी संख्या में युवतियां वापस ही नहीं लौटतीं. यह भी पढ़ें : मध्य प्रदेश में भी लागू हुआ जबरन धर्मांतरण के खिलाफ कानून, गृह विभाग की तरफ से नोटिफिकेशन जारी
एक तरफ जहां बालिकाओं के गायब होने की घटनाओं पर रोक लगाने के लिए कदम उठाए जा रहे हैं, वहीं महिलाओं के सम्मान और सुरक्षा के लिए महिला जागरुकता अभियान चलाया जा रहा है. महिलाओं की रक्षा के लिए जिन लोगों ने रक्षक की भूमिका निभाई, उनके लिए सरकार ने सम्मान अभियान शुरू किया है. कुल मिलाकर मुख्यमंत्री चौहान अब हर क्षेत्र में महिलाओं की सुरक्षा, रक्षा और सम्मान के लिए खड़े होते नजर आना चाहते हैं.
चौहान ने राज्य की चौथी बार सत्ता मार्च 2020 में संभाली थी. उसके बाद अप्रैल से 31 दिसंबर तक के आंकडे जारी कर सरकार की ओर से दावा किया गया है कि अप्रैल-2019 से दिसम्बर-2019 तक की अवधि की तुलना में महिलाओं के विरुद्ध अपराध में उल्लेखनीय कमी आई है. इस तरह तुलनात्मक अवधि में 15.2 प्रतिशत महिला अपराधों में कमी आई है. अप्रैल 2019 से दिसम्बर-2019 के नौ माह की अवधि में कुल 24 हजार 187 मामले दर्ज किये गये, जबकि अप्रैल-2020 से दिसम्बर-2020 के नौ माह की अवधि में महिला अपराधों के 20 हजार 522 मामले ही दर्ज हुए.
एक तरफ जहां चौहान महिला सुरक्षा और सम्मान के लिए पहल कर रहे हैं, वहीं उन्होंने शादी के लिए बालिका की आयु 18 से बढ़ाकर 21 वर्ष करने की पैरवी की है. चौहान की इस पैरवी ने नई बहस को जन्म दे दिया है. वहीं युवती राजेश्वरी देवी का कहना है कि, "यह पहल अच्छी है क्योंकि जब 18 साल की आयु थी तब नौकरी आदि जल्दी मिल जाया करती थी और बहुसंख्यक लडकियां परिजनों की बात मानकर शादी कर लेती थीं, मगर अब युवतियों के नौकरी की तलाश में कई साल गुजर जाते हैं. इतना ही नहीं युवतियां अपने फैसले भी खुद करने लगी हैं, इसलिए अगर शादी की उम्र बढ़ाई जाती है तो अच्छा होगा." यह भी पढ़ें : मध्य प्रदेश में भी लागू हुआ जबरन धर्मांतरण के खिलाफ कानून, गृह विभाग की तरफ से नोटिफिकेशन जारी
वहीं मुख्यमंत्री चौहान की घोषणाओं पर कांग्रेस सवाल उठा रही है. प्रवक्ता दुर्गेष शर्मा का कहना है कि, "चौहान ने अपने पिछले कार्यकालों में हजारों घोषणाएं की थी, जो पूरी नहीं हुई, अब बीते नौ माह में भी सैकड़ों घोषणाएं किए जा रहे है. चौहान का भरोसा सिर्फ घोषणाएं करने में है, उन्हें पूरा करने में नहीं. राज्य में महिलाओं और बेटियों में असुरक्षा का भाव बढ़ा है, क्योंकि अपराध बढ़े है. " राजनीति के जानकारों का मानना है कि मुख्यमंत्री चौहान आधी आबादी के बीच अपनी पैठ बनाए रखना चाहते हैं, यही कारण है कि पूर्ववर्ती कमल नाथ सरकार द्वारा महिला उत्थान के लिए बनाई गई योजनाओं को बंद करने का आरोप लगाते आए हैं. चौहान एक तरफ जहां पुरानी योजनाओं को शुरू करने का दावा कर रहे हैं, तो वहीं नए कदम बढ़ा रहे है इसका मकसद महिलाओं में गहरी पैठ बढ़ाना है.
(The above story first appeared on LatestLY on Jan 12, 2021 09:06 PM IST. For more news and updates on politics, world, sports, entertainment and lifestyle, log on to our website latestly.com).

