Haridwar News: हरिद्वार के जगजीतपुर में दिखा हाथियों का झुंड, वीडियो में देखें कैसे रिहायशी इलाके में पहुंचा काफिला; VIDEO
(Photo Credits NDTV)

Elephants Spotted in Jagjeetpur Residential Area: उत्तराखंड के हरिद्वार जिले से सटे जगजीतपुर क्षेत्र में मंगलवार देर रात एक के बाद एक पांच जंगली हाथियों का काफिला जंगल से निकलकर रिहायशी इलाके में पहुंच गया. सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे वीडियो में साफ देखा जा सकता है कि ये हाथी हरिद्वार-लक्सर मार्ग पर चहलकदमी करते हुए बस्तियों की ओर बढ़ रहे हैं.

 इलाके में अफरा-तफरी मची

हाथियों का झुंड रहवासी इलाके में घुसने के बद इलाके में अफरा-तफरी मच गई और स्थानीय लोगों में दहशत फैल गई. हालांकि, राहत की बात यह रही कि हाथियों ने किसी को नुकसान नहीं पहुंचाया और कुछ देर बाद बिना किसी घटना के वापस जंगल की ओर लौट गए.

जगजीतपुर में दिखा हाथियों का झुंड

रात करीब 11 बजे के आसपास दिखे हाथी

जानकारी के अनुसार, हाथियों का यह झुंड जगजीतपुर के जगदीशपुर क्षेत्र में रात करीब 11 बजे देखा गया. वे लक्सर मार्ग से होते हुए रिहायशी इलाकों की ओर आ गए. यह इलाका जंगल से सटा हुआ है, जहां से ये हाथी भोजन की तलाश में बाहर निकल आए. वायरल वीडियो में पांच हाथी एक-एक कर सड़क पर उतरते हुए नजर आ रहे हैं. वे शांतिपूर्वक आगे बढ़ते हैं, लेकिन उन्हें देखकर आसपास के लोग और वाहन चालक घबरा गए.

स्थानीय लोगों की प्रतिक्रिया

स्थानीय निवासियों ने बताया कि हाथी खेतों की ओर जा रहे थे, जहां उन्हें अक्सर भोजन मिल जाता है।
लेकिन इस बार वे गलती से रिहायशी इलाके में घुस गए. एक निवासी ने बताया "रात को अचानक इतने बड़े झुंड को देखकर डर लग गया. वन विभाग को ऐसी घटनाओं को लेकर सतर्क रहना चाहिए.

वन्यजीव प्रेमी संगठनों ने सरकार से ये मांग

  • हाथियों के लिए सुरक्षित कॉरिडोर तैयार किए जाएं

  • स्थानीय लोगों को जागरूक करने के लिए अभियान चलाया जाए

  • वन विभाग की निगरानी और प्रतिक्रिया प्रणाली को और मजबूत किया जाए

    उठे कई सवाल

    हरिद्वार जैसे जंगली क्षेत्रों में हाथियों का आबादी वाले इलाकों में घुसना अब आम बात बनता जा रहा है. विशेषज्ञों के मुताबिक, जलवायु परिवर्तन, वनों की कटाई और प्राकृतिक आवास की कमी के कारण हाथी भोजन और पानी की तलाश में इंसानी बस्तियों की ओर रुख कर रहे हैं. केवल सितंबर महीने में ही ऐसी कई घटनाएं दर्ज की गई हैं, जिससे स्थानीय लोगों की सुरक्षा पर सवाल उठने लगे हैं.