मध्य प्रदेश में कफ सिरप बनी मौत का कारण, छिंदवाड़ा में छह बच्चों की जान गई
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छिंदवाड़ा: मध्य प्रदेश के छिंदवाड़ा जिले से एक दर्दनाक खबर सामने आई है. बीते एक महीने में यहां छह बच्चों की मौत हो गई. जांच में सामने आया कि इन बच्चों को दी गई खांसी की सिरप दूषित (Contaminated) थी, जिसके चलते उनके किडनी फेल हो गए और उनकी जान नहीं बचाई जा सकी. जिला कलेक्टर शीलेंद्र सिंह ने तुरंत कार्रवाई करते हुए दो खांसी की सिरप की बिक्री पर प्रतिबंध लगा दिया. जांच में पाया गया कि इन सिरप में डायथिलीन ग्लाइकॉल (Diethylene Glycol) नामक जहरीला तत्व मौजूद था.

डायथिलीन ग्लाइकॉल क्या है?

डायथिलीन ग्लाइकॉल एक औद्योगिक सॉल्वेंट है, जिसका इस्तेमाल पेंट, इंक और ब्रेक फ्लूइड बनाने में होता है. यह शरीर के लिए बेहद खतरनाक है और अगर गलती से किसी दवा में मिल जाए तो किडनी और लीवर को गंभीर नुकसान पहुंचा सकता है.

कैसे बिगड़ी बच्चों की तबीयत?

छिंदवाड़ा के परासिया गांव में 24 अगस्त को पहला मामला सामने आया. बच्चे को तेज बुखार और जुकाम हुआ, जिसके बाद उसे खांसी की सिरप दी गई. कुछ ही दिनों में उसे पेशाब करने में तकलीफ होने लगी और हालत बिगड़ने पर नागपुर रेफर किया गया. 7 सितंबर को उस बच्चे की मौत हो गई. धीरे-धीरे ऐसे ही लक्षण वाले पांच और बच्चों की जान चली गई.

डॉक्टरों ने क्या बताया?

मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. नरेश गुनाडे ने बताया कि बच्चों को पहले बुखार और खांसी-जुकाम हुआ. सिरप पीने के बाद उन्हें पेशाब में दिक्कत हुई. इलाज के लिए नागपुर भेजा गया, लेकिन सभी की मौत हो गई. किडनी की बायोप्सी में यह साफ हो गया कि बच्चों की मौत डायथिलीन ग्लाइकॉल की वजह से हुई.

केंद्र और ICMR को दी गई जानकारी

कलेक्टर ने बताया कि इस पूरे मामले की रिपोर्ट भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (ICMR) को भेज दी गई है. साथ ही, पीड़ित बच्चों के खून के सैंपल पुणे स्थित वायरोलॉजी इंस्टीट्यूट भेजे गए हैं.