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Census 2027: जनगणना को लेकर RGI का ऐलान, पहले चरण में अप्रैल से शुरू होगा मकानों का सूचीकरण, प्रक्रिया डिजिटल और जियो-टैगिंग से होगी

भारत के महापंजीयक (RGI) ने घोषणा की है कि जनगणना 2027 के पहले चरण 'मकान सूचीकरण' (Houselisting) की शुरुआत अप्रैल 2026 से होगी. इस बार की जनगणना में डिजिटल सेल्फ-एन्युमरेशन और जियो-टैगिंग जैसी आधुनिक तकनीकों का इस्तेमाल किया जाएगा.

Census 2027: जनगणना को लेकर RGI का ऐलान, पहले चरण में अप्रैल से शुरू होगा मकानों का सूचीकरण, प्रक्रिया डिजिटल और जियो-टैगिंग से होगी

Census 2027: भारत के महापंजीयक और जनगणना आयुक्त मृत्युंजय कुमार नारायण ने सोमवार, 30 मार्च को नई दिल्ली के नेशनल मीडिया सेंटर में आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में आगामी जनगणना की विस्तृत रूपरेखा साझा की. उन्होंने बताया कि 'जनगणना-2027' दो चरणों में आयोजित की जाएगी—पहला चरण 'मकान सूचीकरण और आवास गणना' (HLO) और दूसरा चरण 'जनसंख्या गणना' (PE). पहले चरण का फील्डवर्क अगले महीने यानी अप्रैल 2026 से विभिन्न राज्यों में शुरू होने जा रहा है.

जनगणना की महत्वपूर्ण समयरेखा

जनगणना आयुक्त के अनुसार, देश के अधिकांश हिस्सों के लिए 1 मार्च 2027 को 'संदर्भ तिथि' (Reference Date) माना गया है. हालांकि, लद्दाख, जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड जैसे बर्फबारी वाले क्षेत्रों के लिए यह तिथि 1 अक्टूबर 2026 तय की गई है. यह संदर्भ तिथि पूरे देश में एक समान और विश्वसनीय जनसांख्यिकीय डेटा एकत्र करने के लिए एक 'स्नैपशॉट' के रूप में कार्य करती है.  यह भी पढ़े:  Census Notification: भारत में 2027 में होगी जनगणना, केंद्र सरकार ने जारी की अधिसूचना: जानिए प्रक्रिया और कैसे होगा आपके डेटा का इस्तेमाल

पहले चरण में क्या होगा?

अप्रैल से सितंबर 2026 के बीच चलने वाले 'मकान सूचीकरण' (HLO) चरण में सभी इमारतों और संरचनाओं की सूची बनाई जाएगी. इसमें आवास की स्थिति, उपलब्ध सुविधाओं और संपत्तियों की जानकारी जुटाई जाएगी. इस बार प्रत्येक संरचना को एक विशिष्ट पहचान संख्या दी जाएगी और इमारतों की 'जियो-टैगिंग' (Geo-tagging) भी की जाएगी.

डिजिटल सेल्फ-एन्युमरेशन की सुविधा

जनगणना 2027 की सबसे बड़ी विशेषता इसका डिजिटल स्वरूप है. नागरिकों को 'सेल्फ-एन्युमरेशन' (Self-enumeration) का विकल्प दिया जाएगा, जिससे वे स्वयं अपनी जानकारी पोर्टल पर दर्ज कर सकेंगे. मकान सूचीकरण अभियान शुरू होने से पहले 15 दिनों की एक विशेष विंडो खोली जाएगी, जिसमें लोग अपनी जानकारी ऑनलाइन भर सकेंगे. इससे गणनाकारों पर निर्भरता कम होगी और प्रक्रिया अधिक सटीक बनेगी.

डेटा सुरक्षा और गोपनीयता के कड़े नियम

डेटा सुरक्षा पर जोर देते हुए महापंजीयक ने जनगणना अधिनियम की धारा 15 का हवाला दिया. उन्होंने स्पष्ट किया कि नागरिकों द्वारा दी गई व्यक्तिगत जानकारी पूरी तरह गोपनीय रहेगी. यह जानकारी न तो आरटीआई (RTI) के तहत उजागर की जा सकती है, न ही अदालत में सबूत के तौर पर इस्तेमाल होगी और न ही किसी अन्य संगठन के साथ साझा की जाएगी. डेटा सेंटर्स को 'क्रिटिकल इंफॉर्मेशन इंफ्रास्ट्रक्चर' के रूप में नामित किया गया है.

प्रशासनिक तैयारी और बजट

  • बजट: केंद्रीय कैबिनेट ने दिसंबर 2025 में जनगणना के लिए 11,718.24 करोड़ रुपये के परिव्यय को मंजूरी दी थी.

  • सीमाएं: प्रशासनिक सीमाओं को 1 जनवरी 2026 तक फ्रीज (स्थिर) कर दिया गया है.

  • प्रशिक्षण: देश भर में गणनाकारों के लिए 80,000 से अधिक प्रशिक्षण बैच बनाए गए हैं.

  • राज्यवार योजना: अप्रैल 2026 में 11 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में प्रक्रिया शुरू होगी, जबकि अन्य राज्यों में यह चरणबद्ध तरीके से अगस्त तक चलेगी.

 16 साल बाद हो रही गणना

भारत में आखिरी जनगणना 2011 में हुई थी. 2021 में होने वाली जनगणना कोविड-19 महामारी के कारण टल गई थी. अब 2027 में होने वाली यह गणना देश के भविष्य की नीतियों और संसाधनों के आवंटन के लिए एक महत्वपूर्ण आधार बनेगी. दूसरे चरण (Population Enumeration) में आयु, लिंग, व्यवसाय, साक्षरता और जाति विवरण जैसे व्यक्तिगत डेटा पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा.

(The above story first appeared on LatestLY on Mar 30, 2026 02:56 PM IST. For more news and updates on politics, world, sports, entertainment and lifestyle, log on to our website latestly.com).