गोरखपुर: देश के चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (CDS) जनरल अनिल चौहान ने गोरखपुर में एक कार्यक्रम के दौरान भारत की सैन्य रणनीति और पाकिस्तान के खिलाफ की गई कार्रवाइयों पर बड़ी बातें कही हैं. उन्होंने बताया कि कैसे बालाकोट एयरस्ट्राइक के बाद भारत और पाकिस्तान ने अलग-अलग सबक सीखे और भारत की हमला करने की क्षमता पहले से कहीं ज्यादा घातक हो गई है.
जनरल चौहान ने कहा, "...बालाकोट ऑपरेशन के बाद भारत और पाकिस्तान ने अलग-अलग सबक सीखे. भारत ने लंबी दूरी तक सटीक मार करने वाले हथियारों और हमले के बाद हुए नुकसान का सही आकलन करने पर ध्यान केंद्रित किया. वहीं, पाकिस्तान ने शायद अपनी हवाई सुरक्षा (एयर डिफेंस) को मजबूत करने पर ध्यान दिया."
उरी से लेकर पुलवामा तक, कैसे बदला भारत का जवाब देने का तरीका
CDS ने भारत के बदलते जवाबी हमलों का ज़िक्र करते हुए कहा:
- उरी सर्जिकल स्ट्राइक (2016): "2016 के उरी आतंकी हमले के बाद, भारतीय सेना ने जमीन के रास्ते पाकिस्तान में घुसकर आतंकवादी कैंपों को नष्ट कर दिया था."
- पुलवामा के बाद एयरस्ट्राइक: "पुलवामा हमले के बाद हमने खैबर पख्तूनख्वा इलाके में हवाई हमले किए."
'ऑपरेशन सिंदूर' की थी तैयारी
जनरल चौहान ने एक अहम जानकारी देते हुए बताया, "पहलगाम आतंकी हमले के बाद तक, हम सटीक हमले करने की क्षमता को और बढ़ा चुके थे. जब हमने राजनीतिक नेतृत्व से चर्चा की, तो यह तय हुआ कि सिर्फ ड्रोन और छोटे हथियारों से हमारे राजनीतिक उद्देश्य पूरे नहीं होंगे. बहावलपुर और मुरीदके में बैठे आतंकियों के कैंपों को तबाह करने के लिए वायु सेना का इस्तेमाल जरूरी था."
#WATCH | UP | At an event in Gorakhpur, Chief of Defence Staff General Anil Chauhan says, "...India and Pakistan learned different lessons after the Balakot operation. India focused on long-range precision strike weapons and post-strike damage assessment, and Pakistan might have… pic.twitter.com/Is2YLiwaCK
— ANI (@ANI) September 5, 2025
उन्होंने आगे बताया, "इस 'ऑपरेशन सिंदूर' के दौरान, राजनीतिक नेतृत्व ने हमें स्पष्ट निर्देश दिए थे. संदेश साफ था कि आतंकवादी कैंपों को नष्ट करना है, और जवाबी कार्रवाई केवल तभी करनी है जब हम पर हमला हो. 'ऑपरेशन सिंदूर' के दौरान हमें योजना बनाने और टारगेट चुनने सहित पूरी तरह से ऑपरेशनल आज़ादी दी गई थी."
इस बयान से यह साफ है कि भारत की सेना अब आतंकवाद के खिलाफ किसी भी हद तक जाकर जवाब देने के लिए तैयार है और उसे सरकार का पूरा समर्थन भी हासिल है.













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