CAA विरोधी प्रदर्शनकारियों से वसूली गई रकम वापस करे UP सरकार: सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने यूपी प्रशासन को सीएए के विरोध प्रदर्शनों के दौरान संपत्ति को हुए नुकसान के एवज में की गई सभी वसूली को वापस करने का निर्देश दिया है.
नई दिल्ली, 18 फरवरी: सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने शुक्रवार को उत्तर प्रदेश सरकार (UP Government) को निर्देश दिया कि सीएए विरोधी प्रदर्शनकारियों (CAA Protesters) से वसूली गई संपत्ति (Refund All Recoveries) उन्हें वापस कर दी जानी चाहिए और यह भी कहा कि अगर उन्होंने कथित नुकसान के लिए संबंधित अधिकारियों को पैसे का भुगतान किया है, तो भी उन्हें वापस किया जाना चाहिए. शुरूआत में, उत्तर प्रदेश सरकार का प्रतिनिधित्व करने वाले अतिरिक्त महाधिवक्ता गरिमा प्रसाद ने शीर्ष अदालत को सूचित किया कि राज्य सरकार ने संपत्ति के नुकसान की वसूली के लिए सीएए विरोधी प्रदर्शनकारियों को भेजे गए नोटिस को वापस ले लिया है. सुप्रीम कोर्ट की UP सरकार को फटकार, कहा- CAA प्रदर्शनकारियों के खिलाफ वसूली नोटिस वापस लें, वरना हम कर देंगे रद्द
जस्टिस डी.वाई. चंद्रचूड़ और सूर्यकांत ने कहा कि अगर नोटिस के बाद वसूली की गई है, तो उन्हें वापस भुगतान करना होगा, क्योंकि सरकार ने नोटिस वापस ले लिए हैं. प्रसाद ने कहा कि राज्य सरकार साफ हाथों से अदालत में आई है और शीर्ष अदालत से मामले में संलग्न संपत्तियों के संबंध में यथास्थिति बनाए रखने का आग्रह किया है.
याचिकाकर्ता का प्रतिनिधित्व करने वाले अधिवक्ता नीलोफर खान ने कहा कि सब्जी विक्रेता, रिक्शा चालक आदि सहित कई लोग थे, जिनसे इन नोटिसों के बाद वसूली की गई है और राज्य सरकार को इन नोटिसों को वापस लेने के बाद रिफंड जारी करना चाहिए.
न्यायमूर्ति चंद्रचूड़ ने कहा कि इस दौरान वसूले गए नुकसान की वापसी होगी, हालांकि यह नए कानून के तहत दावे के न्यायाधिकरण के अधीन होगा. प्रसाद ने पीठ से यथास्थिति बनाए रखने का अनुरोध किया और कहा कि कुछ संपत्तियों को राज्य सरकार ने पहले ही कब्जे में ले लिया है.
पीठ ने जवाब दिया कि यह कानून के खिलाफ है और अदालत कानून के खिलाफ नहीं जा सकती. प्रसाद ने प्रस्तुत किया कि राज्य में आदर्श आचार संहिता लागू की गई है.
पीठ ने कहा कि अगर कानून के खिलाफ कुर्की की गई है और अगर ऐसे आदेश वापस ले लिए गए हैं तो कुर्की कैसे चल सकती है? जस्टिस चंद्रचूड़ ने कहा, "एक बार आदेश वापस ले लिए जाने के बाद, फिर कुर्की कैसे जारी रह सकती है.."
प्रसाद ने कहा कि पिछले दो साल में राज्य में कोई घटना नहीं हुई है. हालांकि, शीर्ष अदालत प्रसाद की दलीलों से सहमत नहीं थी.
उत्तर प्रदेश सरकार ने 14 और 15 फरवरी को दो सरकारी आदेश (जीओएस) जारी किए हैं, जिसके तहत सभी कारण बताओ नोटिस वापस लिए जा रहे हैं जो 274 मामलों में सीएए विरोधी प्रदर्शन के दौरान सार्वजनिक और निजी संपत्तियों को नष्ट करने के लिए जारी किए गए थे.
नया कानून - उत्तर प्रदेश सार्वजनिक और निजी संपत्ति के नुकसान की वसूली अधिनियम, 2020 - राज्य सरकार को संपत्ति के नुकसान के दावों का फैसला करने के लिए न्यायाधिकरण स्थापित करने का अधिकार देता है.
शीर्ष अदालत ने 11 फरवरी को उत्तर प्रदेश सरकार से इन नोटिसों को वापस लेने को कहा था, अन्यथा वह उन्हें रद्द कर देगी. शीर्ष अदालत के 2009 और 2018 के फैसलों का हवाला देते हुए पीठ ने कहा कि न्यायिक अधिकारियों को दावा न्यायाधिकरणों में नियुक्त किया जाना चाहिए था, लेकिन राज्य सरकार ने अतिरिक्त जिला मजिस्ट्रेट नियुक्त किए.
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(The above story first appeared on LatestLY on Feb 18, 2022 04:17 PM IST. For more news and updates on politics, world, sports, entertainment and lifestyle, log on to our website latestly.com).

