BMC Job Fraud: मुंबई नगर निगम (BMC) में जालसाजी का एक हैरान करने वाला मामला सामने आया है. आजाद मैदान पुलिस ने विनय जाधव नामक एक कर्मचारी के खिलाफ 1997 में फर्जी दस्तावेजों के आधार पर नौकरी हासिल करने के आरोप में मामला दर्ज किया है. आरोपी ने अनुकंपा नीति (Compassionate Policy) का गलत इस्तेमाल कर पिछले 29 वर्षों से निगम में अपनी सेवाएं दीं और लाखों रुपये का वेतन व लाभ प्राप्त किया.
क्या है पूरा मामला?
एफआईआर के अनुसार, विनय जाधव के पिता मधुकर जाधव का निधन जून 1986 में हुआ था. नियम के मुताबिक, किसी कर्मचारी की मृत्यु के बाद परिवार के केवल एक सदस्य को ही अनुकंपा के आधार पर नौकरी मिल सकती है. जाधव के बड़े भाई, हर्षराज जाधव ने दिसंबर 1986 में ही इस नीति के तहत क्लर्क की नौकरी प्राप्त कर ली थी. यह भी पढ़े: Job Fraud: नौकरी के नाम पर हो रही ठगी, वेबसाइट-ऑफर लेटर सब कुछ फर्जी, फ्रॉड से बचने के किए अपनाएं ये तरीके
नियमों की अनदेखी करते हुए, विनय जाधव ने अगस्त 1995 में दोबारा उसी नीति के तहत आवेदन किया. पुलिस का आरोप है कि जाधव ने कथित तौर पर फर्जी दस्तावेज जमा किए और अक्टूबर 1997 में धोखाधड़ी से नगर निगम में नौकरी हासिल कर ली.
29 साल बाद ऐसे हुआ खुलासे
विनय जाधव बीएमसी के लाइसेंस विभाग (सी डिवीजन) में लाइसेंस इंस्पेक्टर के रूप में कार्यरत थे. इस धोखाधड़ी का खुलासा तब हुआ जब विभाग की प्रशासनिक अधिकारी राजश्री पाटिल (57) ने कर्मचारियों की नियुक्ति, पदोन्नति और स्थानांतरण में अनियमितताओं की जांच शुरू की.
जांच के दौरान यह पाया गया कि उस समय के अधिकारियों ने दस्तावेजों की ठीक से जांच नहीं की थी, जिसका फायदा उठाकर जाधव ने अवैध रूप से नौकरी प्राप्त की. 29 वर्षों के कार्यकाल के दौरान जाधव ने वेतन और अन्य भत्तों के रूप में निगम को लाखों रुपये का वित्तीय नुकसान पहुंचाया है.
कानूनी कार्रवाई और एफआईआर
राजश्री पाटिल की शिकायत के बाद, आजाद मैदान पुलिस ने 28 अप्रैल को विनय जाधव के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 318(4) (धोखाधड़ी) और अन्य संबंधित प्रावधानों के तहत प्राथमिकी दर्ज की है.
पुलिस अब इस बात की भी जांच कर रही है कि क्या उस समय के कुछ अन्य अधिकारियों ने इस जालसाजी में जाधव की मदद की थी. नगर निगम प्रशासन ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए आरोपी की सेवाओं और पिछले रिकॉर्ड की गहन जांच के आदेश दिए हैं.
अनुकंपा नीति का दुरुपयोग
यह मामला सरकारी विभागों में अनुकंपा नियुक्तियों की जांच प्रक्रिया पर सवाल उठाता है. विशेषज्ञों का मानना है कि दस्तावेजों के सत्यापन में हुई चूक के कारण ही आरोपी इतने वर्षों तक सिस्टम को चकमा देने में कामयाब रहा. पुलिस फिलहाल मामले की विस्तृत जांच कर रही है और जल्द ही गिरफ्तारी की संभावना जताई जा रही है.










QuickLY