ट्रंप का 50% टैरिफ लागू... कपड़े, आभूषण, सीफूड सहित सहित ये सेक्टर्स होंगे सबसे ज्यादा प्रभावित
ट्रंप प्रशासन का यह टैरिफ भारत के लिए बड़ा आर्थिक झटका है. सबसे ज्यादा नुकसान छोटे और मध्यम उद्योगों को होगा, जिनकी पहले से ही मार्जिन बहुत पतली है. अब सवाल है भारत के किन उद्योगों पर इसका सबसे ज्यादा असर होगा? आइए जानते हैं.
नई दिल्ली: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) के प्रशासन ने भारत के निर्यात पर 25% अतिरिक्त टैरिफ (Tariff) लगाने का ऐलान किया है, जो 27 अगस्त 2025 से लागू होगा. इसके साथ ही कुल आयात शुल्क 50% तक पहुंच जाएगा, जो अमेरिका से व्यापार करने वाले बड़े देशों में सबसे अधिक है. ट्रंप प्रशासन का यह टैरिफ भारत के लिए बड़ा आर्थिक झटका है. सबसे ज्यादा नुकसान छोटे और मध्यम उद्योगों को होगा, जिनकी पहले से ही मार्जिन बहुत पतली है. अब सवाल है भारत के किन उद्योगों पर इसका सबसे ज्यादा असर होगा? आइए जानते हैं.
विशेषज्ञ एजेंसी CRISIL के अनुसार, यह कदम सबसे ज्यादा सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्योगों (MSMEs) को प्रभावित करेगा. ये क्षेत्र भारत के कुल निर्यात का लगभग 45% हिस्सा रखते हैं. छोटे उद्योगों की लागत बढ़ेगी और मुनाफा घटेगा, जिससे उनकी प्रतिस्पर्धा क्षमता कमजोर होगी.
हीरे-जवाहरात उद्योग पर बड़ा संकट
अमेरिका भारत के कुल हीरा निर्यात का लगभग एक-तिहाई खरीदता है. भारत 10 अरब डॉलर का निर्यात अमेरिका को करता है. टैरिफ बढ़ने से रोजगार और मुनाफे दोनों पर असर होगा. सूरत का डायमंड उद्योग, जो 80% हीरे निर्यात करता है, सबसे ज्यादा प्रभावित होगा.
कपड़ा और रेडीमेड गारमेंट्स पर चोट
अमेरिका को जाने वाले कपड़ा और रेडीमेड गारमेंट्स पर अब 63.9% शुल्क लगेगा. तिरुपुर क्लस्टर (तमिलनाडु), जो भारत के 30% निर्यात का केंद्र है, बुरी तरह प्रभावित होगा. बांग्लादेश और वियतनाम जैसे देश कम टैरिफ (31%) की वजह से बड़ा फायदा उठाएंगे.
सीफूड उद्योग की मुश्किलें
भारत का 32% झींगा (Shrimp) निर्यात अमेरिका जाता है. अब उस पर कुल 60% शुल्क लगेगा. विशाखापट्टनम के एक्वाकल्चर उद्योग पर यह गहरा संकट है. वहीं इक्वाडोर को मात्र 15% टैरिफ का फायदा मिलेगा.
केमिकल और ऑटो पार्ट्स सेक्टर पर असर
ऑर्गेनिक केमिकल्स और अन्य रसायनों पर 50% से ज्यादा ड्यूटी के कारण जापान और दक्षिण कोरिया जैसे देशों को सस्ता विकल्प मिलने से भारत पिछड़ेगा. ऑटो पार्ट्स पर 25% से 50% ड्यूटी लगेगी. गियरबॉक्स और ट्रांसमिशन उपकरण निर्यातक सबसे ज्यादा प्रभावित होंगे.
राहत की खबर: दवाइयां और स्टील
फार्मा सेक्टर (12% निर्यात) पर फिलहाल कोई अतिरिक्त शुल्क नहीं है. स्टील उद्योग पर भी असर कम होगा क्योंकि अमेरिका भारत से ज्यादातर फ्लैट प्रोडक्ट्स आयात करता है, जबकि MSMEs लंबी रॉड और री-रोलिंग पर केंद्रित हैं
कौन-से सेक्टर ज्यादा नुकसान में?
- कपड़ा और रेडीमेड गारमेंट्स
- हीरे-जवाहरात और कारपेट उद्योग
- सीफूड (Shrimps)
- केमिकल्स और ऑटो पार्ट्स
- कृषि उत्पाद- बासमती, मसाले और चाय
घरेलू बाजार से मिलेगी थोड़ी राहत
विशेषज्ञों का मानना है कि इन सेक्टरों को घरेलू बाजार में लगभग 10 अरब डॉलर का अतिरिक्त अवसर मिलेगा. हालांकि, यह नुकसान की भरपाई पूरी तरह से नहीं कर पाएगा. अगर भारत को अपनी स्थिति मजबूत करनी है, तो उसे नए निर्यात बाजार खोजने और घरेलू मांग बढ़ाने पर ध्यान देना होगा.
(The above story first appeared on LatestLY on Aug 27, 2025 04:24 PM IST. For more news and updates on politics, world, sports, entertainment and lifestyle, log on to our website latestly.com).

