बेंगलुरु: कर्नाटक उच्च न्यायालय (Karnataka High Court) ने केम्पेगौड़ा अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे (Kempegowda International Airport) (KIA) पर एक दक्षिण कोरियाई महिला (South Korean Woman) के कथित यौन उत्पीड़न (Sexual Harassment) मामले में आरोपी एयरपोर्ट कर्मचारी को बड़ी राहत देने से इनकार कर दिया है. सोमवार को अदालत ने आरोपी द्वारा दायर उस याचिका को खारिज कर दिया, जिसमें उसके खिलाफ दर्ज एफआईआर (FIR) को रद्द करने की मांग की गई थी. मामले की सुनवाई के दौरान न्यायमूर्ति एम. नागप्रसन्ना (Justice M. Nagaprasanna) की अध्यक्षता वाली पीठ ने आरोपी के आचरण पर कड़ी नाराजगी व्यक्त की और घटना की निंदा की. यह भी पढ़ें: मैसूरु 'कपड़ा बैग' घोटाला: IAS रोहिणी सिंधुरी के खिलाफ आपराधिक जांच के आदेश; कर्नाटक हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को दी मंजूरी
अदालत की कड़ी टिप्पणी
सुनवाई के दौरान न्यायमूर्ति एम. नागप्रसन्ना ने सवाल किया कि आरोपी को क्यों छोड़ा जाना चाहिए. अदालत ने गौर किया कि पीड़िता एक विदेशी नागरिक है और उसने अपनी आपबीती को स्पष्ट रूप से बयां किया है। पी. ने मौखिक रूप से आरोपी से पूछा कि वह महिला को पुरुषों के शौचालय (Men's Restroom) की ओर क्यों ले गया था?
अदालत ने आरोपी के व्यवहार की आलोचना करते हुए पूछा कि वह किस तरह का अधिकारी है. पीठ ने उस औचित्य पर भी सवाल उठाए जिसमें आरोपी ने पीड़िता को पुरुषों के लिए आरक्षित शौचालय में ले जाने की कोशिश की थी.
क्या है पूरा मामला?
यह घटना 19 जनवरी की है, जब दक्षिण कोरियाई महिला अपने देश के लिए उड़ान भरने के लिए हवाई अड्डे पर मौजूद थी. इमिग्रेशन क्लियर करने के बाद जब वह टर्मिनल की ओर बढ़ रही थी, तब ग्राउंड और कार्गो ऑपरेशंस संभालने वाली एक निजी फर्म के कर्मचारी (आरोपी) ने उसे रोका.
महिला की शिकायत के अनुसार, आरोपी ने दावा किया कि उसके चेक-इन सामान में कुछ समस्या है और उसे अलग से जांच की जरूरत है. उसने महिला को डराया कि अगर वह मुख्य स्क्रीनिंग क्षेत्र में वापस गई तो उसकी फ्लाइट छूट सकती है. इसके बाद वह उसे एक पुरुष वॉशरूम के पास ले गया, जहां उसने महिला को 'T' पोजीशन में खड़ा किया और विरोध के बावजूद उसे गलत तरीके से छुआ.
आरोपी की गिरफ्तारी और कानूनी कार्रवाई
पीड़िता ने बताया कि जब उसने विरोध किया, तो आरोपी ने उसे गले लगाया, "थैंक यू" कहा और वहां से चला गया. महिला ने तुरंत हवाईअड्डा सुरक्षा कर्मियों को इसकी सूचना दी, जिन्होंने आरोपी को हिरासत में लेकर बीआईएएल (BIAL) पुलिस के हवाले कर दिया.
पुलिस ने इस संबंध में मामला दर्ज कर जांच शुरू की थी. अब हाईकोर्ट द्वारा हस्तक्षेप करने से इनकार करने के बाद आरोपी के खिलाफ कानूनी कार्यवाही जारी रहेगी.













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