Jabalpur Cruise Accident: मध्य प्रदेश के जबलपुर में हुए बरगी बांध क्रूज हादसे में एक महत्वपूर्ण कानूनी मोड़ आया है. जिला अदालत ने मंगलवार को इस घटना पर स्वत: संज्ञान लेते हुए पुलिस को क्रूज चालक और चालक दल के सदस्यों के खिलाफ प्राथमिकी (FIR) दर्ज करने का आदेश दिया है. अदालत ने स्पष्ट किया कि डूबते हुए यात्रियों को बचाने में क्रूज स्टाफ की विफलता 'आपराधिक मानव वध' (Culpable Homicide) के प्रयास के समान है.
न्यायिक मजिस्ट्रेट डी.पी. सूत्रकार ने बरगी थाना पुलिस को दो दिनों के भीतर मामला दर्ज कर अनुपालन रिपोर्ट सौंपने का निर्देश दिया है. यह भी पढ़े: Jabalpur Bargi Dam Tragedy: एमपी के जबलपुर में बड़ा हादसा, तेज तूफान के चलते पर्यटकों से भरा क्रूज पलटा, 9 शव बरामद; कई अब भी लापता; VIDEOS
बचाव प्रयासों में गंभीर लापरवाही
अदालत ने मीडिया रिपोर्टों और सोशल मीडिया पर उपलब्ध जानकारी के आधार पर नोट किया कि 30 अप्रैल को हुई इस दुर्घटना के समय जहाज का संचालन अनुचित तरीके से किया जा रहा था. कोर्ट ने इस बात पर गहरी नाराजगी जताई कि क्रूज चालक खुद सुरक्षित निकल गया, लेकिन उसने यात्रियों को बचाने का कोई प्रयास नहीं किया.
अदालत के आदेश के अनुसार, यह आचरण भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 106 और 110 के तहत आता है. कोर्ट ने चेतावनी दी कि यदि ऐसी लापरवाही पर कानूनी कार्रवाई नहीं की गई, तो यह भविष्य के लिए एक खतरनाक मिसाल बन सकती है.
साक्ष्यों के साथ छेड़छाड़ का आरोप
इस बीच, क्रूज को जलाशय से निकालने के बाद उसे टुकड़ों में काटे जाने पर विवाद खड़ा हो गया है. हादसे में बाल-बाल बचे अधिवक्ता रोशन आनंद ने आरोप लगाया कि क्रूज को नष्ट करने से महत्वपूर्ण फॉरेंसिक साक्ष्य खत्म हो गए हैं. उन्होंने सवाल उठाया कि 20 साल पुराने इस जहाज की संरचनात्मक मजबूती और इंजन की जांच की जानी चाहिए थी, जिसे अब काटकर असंभव बना दिया गया है.
दूसरी ओर, बरगी नगर पुलिस अधीक्षक (CSP) अंजुल अयांक मिश्रा ने सफाई दी कि SDRF और NDRF की टीमों ने बचाव प्रोटोकॉल के तहत क्रूज को काटा था, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि कोई यात्री अंदर फंसा न हो. पुलिस ने पुष्टि की है कि इंजन को तकनीकी जांच के लिए सुरक्षित रख लिया गया है.
क्या था पूरा मामला?
बरगी बांध में राज्य पर्यटन विभाग द्वारा संचालित एक क्रूज 30 अप्रैल को पलट गया था. इस दुखद हादसे में महिलाओं और एक बच्चे सहित कुल 13 लोगों की जान चली गई थी, जबकि 28 यात्रियों को सुरक्षित बचा लिया गया था. इस घटना ने जल पर्यटन में सुरक्षा मानकों और परिचालन जवाबदेही पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं.
मध्य प्रदेश सरकार ने पहले ही मामले की उच्च स्तरीय जांच के आदेश दे दिए हैं, लेकिन अब अदालत के हस्तक्षेप के बाद इस मामले में पुलिसिया कार्रवाई और तेज होने की उम्मीद है.











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