VIDEO: आप भी खाते है फल तो हो जाएं सावधान! केमिकल से भरें पानी में डालते ही 1 मिनट में पक गया हरा केला, सोशल मीडिया पर हैरान करनेवाला वीडियो आया सामने
सभी को फल खाने का शौक होता है और मरीज इन फलों का सबसे ज्यादा इस्तेमाल करते है, लेकिन अगर आप भी बिना देखें ही फल खरीदते है तो ये आपके स्वास्थ पर असर डाल सकता है.
Chemical Bananas: सभी को फल खाने का शौक होता है और मरीज इन फलों (Fruits) का सबसे ज्यादा इस्तेमाल करते है, लेकिन अगर आप भी बिना देखें ही फल खरीदते है तो ये आपके स्वास्थ पर असर डाल सकता है. केले (Bananas) खाना सभी को पसंद होता है. लेकिन आजकल मार्केट में केलों पर केमिकल (Chemical) डालकर इसको पकाया जाता है और इसके बाद इसे मार्केट में बेचा जाता है.लोग पके और पीले रंग का होने की वजह से जल्दी से इसे खरीद लेते है, लेकिन लोग ये नहीं सोचते की इन केलों को किस तरह से पकाया गया है.ऐसा ही एक वीडियो सोशल मीडिया (Social Media) पर जमकर वायरल हो रहा है. इस वीडियो में देख सकते है की .' एक मजदुर को जब अधिकारियों ने पकड़ लिया तो उसने दिखाया की किस तरह से केमिकल पानी में मिलाकर केले को पकाया जाता है.
यकीन मानिए, ये हरा केला सिर्फ़ एक मिनट में ही पीला होकर बाहर निकला. इसका वीडियो सोशल मीडिया पर जमकर वायरल हो रहा है. इस वीडियो को सोशल मीडिया X पर @priyarajputlive नाम के हैंडल से शेयर किया गया है. ये भी पढ़े:Colored Apples In The Market: बापरे! सब्जियों और फलों को इंजेक्शन और केमिकल लगाने के बाद अब सेब को लगाया जा रहा है लाल कलर, खाने से पहले हो जाएं सावधान-Video
केमिकल से एक मिनट में केला हुआ पीला
लोगों के स्वास्थ के साथ खिलवाड़
बताया जा रहा है की केलों (Bananas) को इथिफोन, प्रोपीन ग्लाइकोल और बैटरी में इस्तेमाल होने वाले पानी में डुबोकर रखा जा रहा है.इससे केले कुछ ही देर में पीले पड़ जाते हैं. कई जगह अब भी कार्बाइड (Carbide) का उपयोग किया जा रहा है, जो पूरी तरह प्रतिबंधित है. इस वीडियो में देख सकते है की ,' एक शख्स कह रहा है की ,' मेरी इसमें कोई गलती नहीं है, मैं मजदुर हूं. इसके बाद वह केले को एक बाल्टी जिसमें केमिकल मिला हुआ होता है, इसमें डूबोता है, इसके एक मिनट में ही हरें केले पूरी तरह से पीले हो जाते है.
प्राकृतिक और केमिकल से पके केले में क्या होता है फर्क?
प्राकृतिक रूप (Natural Form) से पके हुए केले का डंठल काला और छिलका गर्द पीला होता है.सतह पर छोटे काले धब्बे मौजूद रहते हैं.ऐसे केले 7 से 10 दिन तक सुरक्षित रहते हैं.
कार्बाइड से पके केले
इसमें केले का डंठल हरा होता है और रंग नींबुई पीला दिखाई देता है.छिलका एकदम साफ पीला होता है, दाग-धब्बे नहीं दिखते.72 घंटे में ही ये खराब होने लगते हैं.
ज्यादा समय तक टिकते नहीं और जल्दी सड़ने लगते हैं.
कार्बाइड के खतरे
कार्बाइड पानी (Carbide Water) में डालने पर असिटिलीन गैस बनाता है, जिसका उपयोग इंडस्ट्रियल वेल्डिंग (Industrial Welding) में किया जाता है. जब केले को इसमें डुबोया जाता है तो उससे निकलने वाली गर्मी केलों को पकाती है. लेकिन यह गर्मी और गैस के अंश हमारे शरीर में पहुंचकर गंभीर स्वास्थ्य समस्याएं पैदा कर सकते हैं.यही कारण है कि सरकार ने इसके प्रयोग पर रोक लगाई है, बावजूद इसके बाजारों में इसका धड़ल्ले से उपयोग जारी है.