Fact Check: क्या सच में असम के CM हिमंत बिस्वा सरमा को किया गया गिरफ्तार, सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो का दावा है फर्जी, जाने इसकी सच्चाई
सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल हो रहा है. जिसमें दावा किया जा रहा है की असम के सीएम हिमंत बिस्वा सरमा को गिरफ्तार किया गया है. लेकिन क्या ये दावा और वीडियो सही है. आईये जानते है.
Fact Check: सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल हो रहा है. जिसमें दावा किया जा रहा है की असम के सीएम हिमंत बिस्वा सरमा को गिरफ्तार किया गया है. लेकिन क्या ये दावा और वीडियो सही है. आईये जानते है.इस वीडियो के साथ दावा किया जा रहा है कि असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा को गिरफ्तार कर लिया गया है. कई यूज़र्स इस क्लिप को शेयर करते हुए इसे राजनीतिक घटनाक्रम से जोड़ रहे हैं. लेकिन ये दावा पूरी तरीके से झूठा है और ये वीडियो सीएम हिमंत की नहीं बलि दरबंगा कोर्ट परिसर के वकील सुशील चौधरी की है.
जिन्हें पुलिस में हिरासत में लिया है. इस वीडियो को फेसबुक पर शेयर किया जा रहा है. ये भी पढ़े:Fact Check: संभल में कावंड यात्रा देखने गए दलितों को खंभे से बांधकर पीटा? भ्रामक तरीके से वायरल हो रहा VIDEO, जानें असली सच
असम के सीएम हिमंत बिस्वा सरमा का नहीं है ये वीडियो
किस घटना का है वीडियो?
'विश्वास न्यूज़ ' ने जब इस वीडियो को गूगल लेंस की सहायता से वीडियो के की-फ्रेम्स को सर्च करने पर यह पता चला कि यह वीडियो 20 जून 2025 को एक यूट्यूब चैनल और इंस्टाग्राम हैंडल पर डाला गया था. वहां दी गई जानकारी के अनुसार, यह दृश्य दरभंगा कोर्ट परिसर का है. इसमें दिख रहे व्यक्ति अधिवक्ता सुशील कुमार चौधरी हैं, जिन्हें वरिष्ठ वकील की गिरफ्तारी का विरोध करने के कारण हिरासत में लिया गया.
अम्बर इमाम हाशमी पर क्या है मामला?
अमर उजाला की एक रिपोर्ट के अनुसार, वरिष्ठ अधिवक्ता अम्बर इमाम हाशमी को 32 साल पुराने हत्या के मामले में कोर्ट से ही गिरफ्तार कर जेल भेजा गया. जांच में यह बात सामने आई कि हाशमी ने कोर्ट को यह कहते हुए गुमराह किया था कि वे जिले से बाहर हैं, जबकि वे उसी दिन अदालत में एक अन्य केस में बहस करने पहुंचे थे.
द ट्रिकी स्क्राइब डॉट कॉम की रिपोर्ट में सामने आया सच
द ट्रिकी स्क्राइब डॉट कॉम की खबर के अनुसार, अधिवक्ता हाशमी की गिरफ्तारी के बाद वकीलों ने विरोध दर्ज कराया, और इस दौरान अधिवक्ता सुशील चौधरी को पुलिस ने कथित तौर पर अमानवीय ढंग से हिरासत में लिया. हालांकि बाद में उन्हें थाने से रिहा कर दिया गया.
वायरल पोस्ट की हकीकत
जांच में यह भी सामने आया कि जिस फेसबुक पेज से यह वीडियो पोस्ट किया गया, उसे 6,000 से अधिक लोग फॉलो करते हैं और यह पेज असम से ऑपरेट किया जा रहा है. इसका मतलब है कि इस तरह की फर्जी जानकारियां एक रणनीति के तहत फैलाई जा रही हैं.विश्वास न्यूज़, अमर उजाला और द ट्रिकी स्क्राइब डॉट कॉम जैसी विश्वसनीय खबरों और पड़तालों से यह स्पष्ट हो गया है कि मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा की गिरफ्तारी की कोई सच्चाई नहीं है. वायरल वीडियो को झूठे दावे के साथ फैलाया जा रहा है, जबकि इसका असली संदर्भ दरभंगा के एक पुराने केस से जुड़ा हुआ है.
(The above story first appeared on LatestLY on Jul 28, 2025 07:07 PM IST. For more news and updates on politics, world, sports, entertainment and lifestyle, log on to our website latestly.com).

