Archana Tiwari Case: ट्रेन से गायब हुई अर्चना तिवारी का राज खुला, प्रेमी के साथ रहने के लिए रचा था नाटक
ट्रेन से रहस्यमयी तरीके से लापता हुई वकील अर्चना तिवारी का मामला सुलझ गया है. असल में उसका अपहरण नहीं हुआ था, बल्कि वह परिवार द्वारा तय की जा रही शादी से बचने के लिए अपने प्रेमी के साथ भाग गई थी. पुलिस ने 13 दिनों बाद उसे नेपाल बॉर्डर के पास से ढूंढ निकाला और इस पूरी सुनियोजित साजिश का पर्दाफाश किया.
अर्चना तिवारी (Archana Tiwari) कुछ दिन पहले इंदौर से कटनी जाते हुए नर्मदा एक्सप्रेस ट्रेन (Narmada Express Train) से रहस्यमयी तरीके से गायब हो गई थी, उसकी गुत्थी अब सुलझ गई है. 13 दिन की खोजबीन के बाद पुलिस ने उसे नेपाल बॉर्डर (Nepal Border) के पास से ढूंढ निकाला है. और कहानी में जो मोड़ सामने आया है, वो किसी फिल्म की स्क्रिप्ट से कम नहीं है. पता चला है कि अर्चना का अपहरण हुआ ही नहीं था, बल्कि उसने अपने प्रेमी के साथ रहने के लिए यह सारा नाटक खुद रचा था.
प्यार, परिवार का दबाव और एक खतरनाक प्लान
यह कहानी शुरू होती है इसी साल 1 जनवरी को एक ट्रेन में हुई मुलाकात से. अर्चना, जो वकील हैं और जज बनने की तैयारी कर रही हैं, की मुलाकात शुजालपुर के रहने वाले सारांश जैन से हुई. दोनों में पहले दोस्ती और फिर प्यार हो गया.
इस बीच, अर्चना के घरवाले उस पर शादी के लिए दबाव बना रहे थे. उन्होंने एक पटवारी से उसका रिश्ता भी तय कर दिया था. अर्चना यह शादी नहीं करना चाहती थी. उसने यह बात अपने प्रेमी सारांश को बताई. सारांश के पिता एक सब्जी का ठेला लगाते हैं. दोनों ने हरदा के एक ढाबे पर बैठकर फैसला किया कि वे घर से भाग जाएंगे.
लेकिन फिर उन्होंने प्लान बदल दिया. भागने की जगह उन्होंने गुमशुदगी का नाटक करने का सोचा. अर्चना को लगा कि पुलिस गुमशुदगी के मामले को इतनी गंभीरता से नहीं लेगी और वो अपने परिवार से दूर सारांश के साथ एक नई जिंदगी शुरू कर सकेगी.
Bhopal, Madhya Pradesh: GRP SP Rahul Lodha says, "Archana Tiwari disappeared on the Indore-Bilaspur train on the 7th or 8th. The police searched for her extensively. After 13 days, we finally found her. We conducted physical searches and reviewed CCTV footage. However, the… pic.twitter.com/ij8QNLsqnw
— IANS (@ians_india) August 20, 2025
कैसे दिया गया प्लान को अंजाम?
इस फिल्मी प्लान में एक तीसरे व्यक्ति, तेजन्दर ने भी उनकी मदद की.
- ट्रेन से उतरना: तेजन्दर ने अर्चना को सलाह दी कि वो स्टेशन पर न उतरे, बल्कि इटारसी से पहले आउटर सिग्नल पर ही उतर जाए ताकि CCTV कैमरों से बच सके.
- कपड़े बदलना: तेजन्दर ने ही ट्रेन के अंदर अर्चना को दूसरे कपड़े दिए. अर्चना अपने बी-3 कोच से निकलकर ए-2 कोच में गई और वहीं से बाहर निकली.
- मोबाइल फेंकना: अर्चना ने अपना मोबाइल फोन भी तेजन्दर को दे दिया और उसे जंगल में फेंकने को कहा ताकि पुलिस उसे ट्रैक न कर पाए.
प्लान के मुताबिक, अर्चना ने अपना सारा सामान जानबूझकर ट्रेन की सीट पर ही छोड़ दिया, ताकि सबको लगे कि वह रास्ते में कहीं गिर गई है या उसका अपहरण हो गया है.
पुलिस कैसे पहुंची उन तक?
अर्चना और सारांश पुलिस से बचने के लिए बहुत चालाकी से काम कर रहे थे. वे व्हाट्सएप कॉल पर बात करते थे ताकि कॉल रिकॉर्ड न हो. उन्होंने टोल बचाने वाले रास्तों का इस्तेमाल किया. मामला जब मीडिया में उछला तो वे मध्य प्रदेश छोड़कर पहले हैदराबाद और फिर नेपाल भाग गए.
लेकिन पुलिस ने जब सारांश को पकड़ा तो सारी कहानी परत-दर-परत खुल गई. सारांश ने पूरा सच उगल दिया. इसके बाद पुलिस ने सारांश के जरिए ही अर्चना को नेपाल बॉर्डर पर बुलवाया और उसे पकड़ लिया.
कहानी का अंत: कोई केस नहीं बनेगा
पुलिस का कहना है कि इस मामले में कोई भी आपराधिक केस नहीं बनता है. क्योंकि अर्चना बालिग है और वह अपनी मर्जी से गई थी, इसलिए इसे अपहरण नहीं माना जा सकता. यह पूरी कहानी प्यार, परिवार के दबाव और फिल्मी পরিকল্পনার एक अनोखा मामला बनकर रह गई है.
(The above story first appeared on LatestLY on Aug 20, 2025 03:56 PM IST. For more news and updates on politics, world, sports, entertainment and lifestyle, log on to our website latestly.com).

