Sanjay Raut On Cancer Diagnosis: शिवसेना (UBT) के वरिष्ठ नेता और राज्यसभा सांसद संजय राउत, जो अपनी प्रखर बयानबाजी के लिए जाने जाते हैं. इस बार उन्होंने अपने स्वास्थ्य को लेकर एक बड़ा खुलासा किया है. एक निजी समाचार चैनल 'एबीपी माझा' के कार्यक्रम 'माझा कट्टा' में दिए गए साक्षात्कार में राउत ने बताया कि उन्हें दिवाली 2025 से कुछ दिन पहले पेट के कैंसर (Stomach Cancer) का पता चला था. पिछले कुछ हफ्तों से सार्वजनिक जीवन से दूर रहे राउत ने इस बीमारी के खिलाफ अपनी जंग और महाराष्ट्र की बदलती राजनीति पर विस्तार से चर्चा की.
दिवाली के दौरान हुआ बीमारी का पता
संजय राउत ने बताया कि शुरुआत में उन्होंने लक्षणों को सामान्य थकान और भागदौड़ भरी जीवनशैली का परिणाम मानकर नजरअंदाज कर दिया था. हालांकि, उनके भाई और विधायक सुनील राउत के आग्रह पर जब ब्लड टेस्ट कराया गया, तो रिपोर्ट में कैंसर की पुष्टि हुई. राउत ने कहा, "दिवाली से दो-चार दिन पहले अचानक निदान हुआ. मुझे लगा था कि देर रात तक यात्रा और नींद की कमी से समस्या हो रही है, लेकिन रिपोर्ट ने सब बदल दिया." यह भी पढ़े: Pankaj Dheer Death: दिग्गज एक्टर पंकज धीर के अंतिम संस्कार में शामिल हुए सलमान खान, कैंसर से लंबी लड़ाई के बाद हुआ निधन
संजय राउत ने खुद के बारे में किया खुलासा
"बीमारी से ज्यादा दर्दनाक था इलाज"
कैंसर के इलाज के दौरान हुए शारीरिक कष्ट को साझा करते हुए राउत ने बताया कि कीमोथेरेपी और रेडिएशन का दौर बेहद कष्टदायक था. उन्होंने बताया कि दिवाली के समय जब पूरा देश उत्सव मना रहा था, वह अस्पताल में भर्ती थे.
राउत ने भावुक होते हुए कहा, "इलाज बीमारी से भी ज्यादा भयानक होता है. एक समय ऐसा था जब पानी पीना भी मुश्किल हो गया था. लगभग डेढ़ महीने तक मैं घर या अस्पताल में ही सीमित रहा. अब मैं धीरे-धीरे ठीक हो रहा हूं और ताकत वापस पाने की कोशिश कर रहा हूं."
मराठी कार्ड और चुनावी नतीजों पर बयान
स्वास्थ्य के साथ-साथ राउत ने राजनीतिक मोर्चे पर भी कड़ा रुख अपनाया. उन्होंने हालिया स्थानीय निकाय चुनाव (नगर निगम चुनाव 2026) के नतीजों का जिक्र करते हुए दावा किया कि मुंबई के 'भूमिपुत्र' (मराठी भाषी) आज भी मजबूती से उद्धव ठाकरे गुट के साथ खड़े हैं. उन्होंने आरोप लगाया कि सत्ताधारी गठबंधन को केवल उन क्षेत्रों में बढ़त मिली है जहां गैर-मराठी मतदाताओं का दबदबा है.
ठाकरे भाइयों के मिलन पर बोले राउत
उद्धव ठाकरे और राज ठाकरे के करीब आने की खबरों पर राउत ने स्पष्ट किया कि यह किसी राजनीतिक रणनीति से ज्यादा एक भावनात्मक निर्णय था. उन्होंने कहा, "दोनों भाई महाराष्ट्र के हित और मराठी अस्मिता की रक्षा के लिए साथ आए हैं. जनता भी यही चाहती थी कि मराठी ताकत एकजुट हो. यदि वे इस समय साथ नहीं आते, तो इतिहास उन्हें माफ नहीं करता."













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