सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में फैसला सुनाया कि एक महिला सीआरपीसी की धारा 125 के तहत अपने दूसरे पति से भरण-पोषण का दावा करने की हकदार है, भले ही उसकी पहली शादी कानूनी रूप से भंग न हुई हो. शीर्ष अदालत ने स्पष्ट किया कि तलाक का औपचारिक आदेश अनिवार्य नहीं है. सुप्रीम कोर्ट ने कहा, "अगर महिला और उसका पहला पति आपसी सहमति से अलग होने के लिए सहमत हैं, तो कानूनी तलाक की अनुपस्थिति उसे अपने दूसरे पति से भरण-पोषण मांगने से नहीं रोकती है." जस्टिस BV नागरत्ना और सतीश चंद्र शर्मा की पीठ ने तेलंगाना हाई कोर्ट के उस आदेश के खिलाफ महिला की अपील को स्वीकार करते हुए राहत प्रदान की, जिसमें उसे सीआरपीसी की धारा 125 के तहत उसके दूसरे पति से भरण-पोषण देने से सिर्फ इसलिए मना कर दिया गया था क्योंकि पहले पति के साथ उसका विवाह कानूनी रूप से भंग नहीं हुआ था. यह भी पढ़ें: Bombay HC Judgement: नाबालिग से पासपोर्ट रखने का अधिकार नहीं छीना जा सकता; पुणे की छात्रा को बॉम्बे हाईकोर्ट से राहत
एक महिला CRPC की धारा 125 के तहत अपने दूसरे पति से मेंटेनेंस का दावा करने की हकदार है.
The Supreme Court ruled that a woman is entitled to claim maintenance under Section 125 of the Cr.P.C. from her second husband, even if her first marriage was not legally dissolved.
Read more: https://t.co/SQDTC1HHEN#SupremeCourt pic.twitter.com/B3awJG5XRM
— Live Law (@LiveLawIndia) February 5, 2025
(SocialLY के साथ पाएं लेटेस्ट ब्रेकिंग न्यूज, वायरल ट्रेंड और सोशल मीडिया की दुनिया से जुड़ी सभी खबरें. यहां आपको ट्विटर, इंस्टाग्राम और यूट्यूब पर वायरल होने वाले हर कंटेंट की सीधी जानकारी मिलेगी. ऊपर दिखाया गया पोस्ट अनएडिटेड कंटेंट है, जिसे सीधे सोशल मीडिया यूजर्स के अकाउंट से लिया गया है. लेटेस्टली स्टाफ द्वारा इसमें कोई बदलाव या एडिट नहीं किया गया है. सोशल मीडिया पोस्ट लेटेस्टली के विचारों और भावनाओं का प्रतिनिधित्व नहीं करता है, हम इस पोस्ट में मौजूद किसी भी कंटेंट के लिए कोई जिम्मेदारी या दायित्व स्वीकार नहीं करते हैं.)












QuickLY