Mumbai 1993 Bomb Blasts Case: मुंबई बम ब्लास्ट का दोषी अबू सालेम को बॉम्बे HC से बड़ा झटका, सुरक्षा कारणों से पैरोल की याचिका ख़ारिज
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Mumbai 1993 Bomb Blasts Case:  बॉम्बे हाई कोर्ट ने गुरुवार को 1993 के मुंबई सीरियल ब्लास्ट मामले के दोषी और गैंगस्टर अबू सालेम (Abu Salem) की पैरोल याचिका को सिरे से खारिज कर दिया. कोर्ट ने पुलिस की उस प्रतिकूल रिपोर्ट पर गौर किया जिसमें कहा गया था कि यदि सालेम को रिहा किया गया तो कानून-व्यवस्था की गंभीर स्थिति पैदा हो सकती है. जस्टिस अजय गडकरी और जस्टिस श्याम चांडक की पीठ ने अपना फैसला सुनाते हुए कहा कि याचिका में कोई मेरिट नहीं है.

भाई के निधन के बाद मांगी थी पैरोल

अबू सालेम ने नवंबर 2025 में अपने बड़े भाई अबू हकीम अंसारी की मृत्यु के बाद उत्तर प्रदेश के आजमगढ़ जाने के लिए 14 दिनों की पैरोल मांगी थी. आजमगढ़ को पुलिस ने सांप्रदायिक रूप से संवेदनशील क्षेत्र बताया है. जब जेल अधिकारियों ने उसकी अर्जी नामंजूर कर दी, तो सालेम ने दिसंबर 2025 में हाई कोर्ट का रुख किया था. यह भी पढ़े:  डॉन अबू सलेम ने बड़े भाई अबू हाकिम के निधन के बाद मांगी इमरजेंसी पैरोल, बॉम्बे हाईकोर्ट का किया रुख

राज्य सरकार-सीबीआई का कड़ा विरोध

राज्य सरकार और केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने सालेम की याचिका का पुरजोर विरोध किया. सरकारी वकील आशीष सतपुते ने दलील दी कि पुलिस रिपोर्ट के अनुसार सालेम की रिहाइ से सार्वजनिक शांति भंग होने की आशंका है. रिपोर्ट में यह भी उल्लेख किया गया कि कोई भी व्यक्ति सालेम के लिए 'जमानतदार' (Surety) बनने को तैयार नहीं है.

एस्कॉर्ट खर्च और बचाव पक्ष की दलीलें

सालेम की वकील फरहाना शाह ने तर्क दिया कि पुलिस की रिपोर्ट केवल आशंकाओं पर आधारित है और इसके लिए कोई ठोस सामग्री नहीं दी गई है. जेल अधिकारियों ने प्रस्ताव दिया था कि सालेम को पुलिस एस्कॉर्ट के साथ दो दिनों की पैरोल मिल सकती है, बशर्ते वह एस्कॉर्ट का खर्च खुद उठाए. हालांकि, वकील ने कहा कि सालेम 20 साल से जेल में है और वह 1 लाख रुपये से अधिक का खर्च वहन नहीं कर सकता.

कोर्ट ने सालेम के आपराधिक इतिहास पर की टिप्पणी

अदालत ने अपने आदेश में सालेम के पिछले रिकॉर्ड का जिक्र किया. बेंच ने नोट किया कि याचिकाकर्ता देश से भाग गया था और उसे पुर्तगाल से प्रत्यर्पित (Extradite) कर वापस लाया गया था.

  • कोर्ट ने कहा कि सालेम 1993 के भीषण बम धमाकों में दोषी पाया गया है.

  • सरकारी वकील ने यह भी बताया कि सालेम जिस 40वें की रस्म के लिए पैरोल मांग रहा था, उसकी तारीख पहले ही निकल चुकी है.

संजय दत्त का जिक्र और प्रत्यर्पण संधि

सुनवाई के दौरान सालेम की वकील ने तर्क दिया कि सालेम केवल हथियार पहुंचाने का दोषी था, वह मुख्य साजिशकर्ता नहीं था. उन्होंने अभिनेता संजय दत्त का उदाहरण देते हुए कहा कि वे सजा काट कर बाहर आ चुके हैं, लेकिन सालेम के नाम के कारण उसे रियायत नहीं मिल रही है. इसके अलावा, प्रत्यर्पण संधि (Extradition Treaty) का हवाला देते हुए कहा गया कि सालेम को पैरोल देने पर कोई रोक नहीं है.

बहरहाल, हाई कोर्ट ने जेल अधिकारियों और पुलिस की रिपोर्ट से सहमति जताते हुए सालेम को किसी भी प्रकार की राहत देने से इनकार कर दिया. सालेम फिलहाल मुंबई की तलोजा जेल में अपनी सजा काट रहा है.