Aditya Pancholi Assault Case: मुंबई की एक सत्र अदालत ने बॉलीवुड अभिनेता आदित्य पंचोली को 2005 के एक हमले के मामले में दोषी ठहराए जाने के फैसले को बरकरार रखा है, लेकिन उनकी एक साल की जेल की सजा को संशोधित करते हुए उन्हें अच्छे आचरण के बॉन्ड पर रिहा करने का आदेश दिया है. कोर्ट ने 59 वर्षीय अभिनेता को प्रोबेशन ऑफ ऑफेंडर्स एक्ट के तहत राहत दी, लेकिन साथ ही पीड़ित प्रतीक पाशिने को 1.5 लाख का मुआवजा देने का निर्देश भी दिया.
इससे पहले, नवंबर 2016 में अंधेरी की मेट्रोपॉलिटन मजिस्ट्रेट अदालत ने पंचोली को आईपीसी की धारा 325 (गंभीर चोट पहुंचाने का अपराध) के तहत दोषी ठहराया था और एक साल की साधारण कैद की सजा सुनाई थी. पंचोली ने इस फैसले को चुनौती दी थी, जिस पर अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश डी. जी. धोबले ने गुरुवार को आंशिक रूप से उनकी अपील स्वीकार की और जेल की सजा से राहत दे दी.
क्या था मामला?
यह घटना अगस्त 2005 की है जब आदित्य पंचोली का अपने पड़ोसी प्रतीक पाशिने से पार्किंग को लेकर विवाद हुआ था. शाम को जब पंचोली घर लौटे तो उन्होंने देखा कि उनकी पार्किंग स्पॉट पर कोई और कार खड़ी थी. उन्होंने अपनी कार उसके पीछे लगा दी. रात 8 बजे पाशिने के वॉचमैन ने उन्हें फोन कर कार हटाने के लिए कहा. दोनों के बीच इंटरकॉम पर बहस हुई, लेकिन पाशिने ने अंततः कार हटाने की बात मानी. जैसे ही वह नीचे आए, पंचोली वहां पहुंचे और उन पर हमला कर दिया. पाशिने के अनुसार, जब उनके पिता बीच-बचाव करने आए, तो पंचोली ने उन्हें भी मारा.
अगले दिन पाशिने ने वर्सोवा पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज करवाई, जिसके बाद पंचोली के खिलाफ आईपीसी की धारा 323 (साधारण चोट पहुंचाने), 325 (गंभीर चोट पहुंचाने), 504 (शांति भंग करने के इरादे से अपमान) और 501(2) (मानहानि) के तहत मामला दर्ज किया गया था.
हालांकि, अब कोर्ट ने उनकी दोषसिद्धि को बरकरार रखते हुए भी उन्हें जेल की सजा से राहत दे दी है.












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