Big Change in Digital Payments: RBI की बड़ी तैयारी,  डिजिटल पेमेंट्स में ऑनलाइन फ्रॉड रोकने के लिए नियमों में हो सकता है बड़ा बदलाव
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Big Change in Digital Payments:  भारत में बढ़ते डिजिटल फ्रॉड को देखते हुए भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) भुगतान प्रणाली में कुछ बड़े सुरक्षात्मक बदलाव करने की योजना बना रहा है. आरबीआई ने गुरुवार को एक चर्चा पत्र (Discussion Paper) जारी किया है, जिसमें 10,000 रुपये से अधिक के 'पुश पेमेंट्स' (जैसे UPI या IMPS) में देरी करने का प्रस्ताव दिया गया है. इसका मुख्य उद्देश्य साल 2025 में हुए 22,930 करोड़ रुपये के बड़े फ्रॉड के आंकड़ों को नियंत्रित करना है.

10,000 रुपये से अधिक के भुगतान पर 'टाइम लैग' का प्रस्ताव

आरबीआई के पहले प्रस्ताव के अनुसार, 10,000 रुपये से अधिक के अकाउंट-टू-अकाउंट ट्रांसफर को निष्पादित करने से पहले बैंक ग्राहक के स्तर पर एक घंटे के लिए रोक सकते हैं. इस एक घंटे के दौरान, ग्राहक के पास लेनदेन को रद्द करने का विकल्प होगा. यदि कोई लेनदेन संदिग्ध लगता है, तो बैंक को भुगतान करने वाले से दोबारा पुष्टि करनी होगी. हालांकि, मर्चेंट भुगतान, ई-मेंडेट और चेक जैसे लेनदेन को इससे छूट दी जाएगी.

वरिष्ठ नागरिकों के लिए 'ट्रस्टेड पर्सन' की सुरक्षा

 

धोखाधड़ी के मामलों में वरिष्ठ नागरिकों की सुरक्षा के लिए एक विशेष विकल्प दिया गया है. इसके तहत 70 वर्ष से अधिक आयु के नागरिकों और दिव्यांग व्यक्तियों के लिए 50,000 रुपये से अधिक के ट्रांसफर पर एक 'विश्वस्त व्यक्ति' (Trusted Person) का प्रमाणीकरण अनिवार्य किया जा सकता है. आंकड़ों के अनुसार, इस आयु वर्ग में होने वाली धोखाधड़ी का मूल्य कुल रिपोर्ट किए गए फ्रॉड का लगभग 92 प्रतिशत है.

सोशल इंजीनियरिंग पर वार: क्यों जरूरी है यह देरी?

 

आरबीआई ने नोट किया है कि वर्तमान में ज्यादातर डिजिटल फ्रॉड तकनीकी कमियों के कारण नहीं, बल्कि 'सोशल इंजीनियरिंग' (धोखाधड़ी से पीड़ित को डराकर या लालच देकर पैसे ट्रांसफर करवाना) के जरिए होते हैं. जालसाज अक्सर पीड़ित पर मनोवैज्ञानिक दबाव बनाते हैं. भुगतान में देरी करने से जालसाज का यह मनोवैज्ञानिक नियंत्रण टूट जाएगा और पीड़ित को सोचने का समय मिल सकेगा.

'किल स्विच' और अन्य सुरक्षा उपाय

आरबीआई ने 'किल स्विच' (Kill Switch) का भी प्रस्ताव रखा है. यह एक ऐसा फीचर होगा जो ग्राहकों को एक ही स्टेप में अपने अकाउंट के सभी डिजिटल भुगतान चैनलों को तुरंत अक्षम (Disable) करने की अनुमति देगा. इसके अलावा, व्यक्तिगत और छोटे व्यापारिक खातों में 25 लाख रुपये से अधिक के वार्षिक क्रेडिट पर 'शैडो क्रेडिट' की व्यवस्था हो सकती है, जहाँ पैसा तभी खाते में आएगा जब खाताधारक बैंक को लेनदेन की वैधता के बारे में संतुष्ट कर देगा.

बदलाव और चुनौतियां

हालांकि आरबीआई ने स्वीकार किया है कि भुगतान में देरी करने से 'इंस्टेंट पेमेंट' (तुरंत भुगतान) का मूल सिद्धांत प्रभावित हो सकता है और इससे उपयोगकर्ता भ्रमित भी हो सकते हैं. इस चर्चा पत्र पर सभी स्टेकहोल्डर्स 8 मई 2026 तक आरबीआई के पोर्टल के माध्यम से अपनी राय दे सकते हैं. प्रतिक्रियाओं की समीक्षा के बाद केंद्रीय बैंक इस पर अंतिम दिशा-निर्देश जारी करेगा.