देश की खबरें | मेइती और कुकी के बीच नफरत, अविश्वास समाप्त करने के लिए काम कर रहे हैं: उइके

चुराचांदपुर, 29 जुलाई मणिपुर की राज्यपाल अनुसुइया उइके ने शनिवार को कहा कि वह नफरत और अविश्वास खत्म करने के लिए काम कर रही हैं, जिसने मेइती और कुकी समुदायों के संबंधों में तनाव उत्पन्न कर दिया है।

उइके ने चुराचांदपुर जिले में एक राहत शिविर का दौरा करने के बाद पत्रकारों से बात करते हुए कहा कि वह दो समुदायों का प्रतिनिधित्व करने वाले संगठनों से मिल रही हैं और राज्य में शांति एवं सामान्य स्थिति बहाल करने के लिए उनका सहयोग मांग रही हैं।

उन्होंने कहा, ‘‘मैं अपने भाइयों और बहनों का दुख साझा करने के लिए दूसरी बार यहां आयी हूं। ये लोग लगभग तीन महीने से अपने घरों से दूर हैं। बहुत से लोगों ने आगजनी में अपने घर और अपने-अपने (कीमती) सामान खो दिये हैं। उनके पास कुछ भी नहीं बचा है। मैं यहां यह देखने आई हूं कि इन लोगों को शिविर में किसी समस्या का सामना न करना पड़ रहा हो।’’

उन्होंने कहा, ‘‘मैंने सरकार को बुनियादी सुविधाएं सुनिश्चित करने के निर्देश दिये हैं। मुझे यह भी पता चला कि यहां दवाओं की भी समस्या है। उन्हें बहुत सी चीजें नहीं मिल रही हैं, क्योंकि ट्रक यहां नहीं पहुंच रहे हैं। फिर भी, आवश्यक व्यवस्थाएं की जा रही हैं और मिजोरम द्वारा भी मदद की जा रही है।’’

राज्यपाल ने कहा कि जातीय संघर्ष प्रभावित राज्य में शांति स्थापित करने के लिए लोगों, विशेषकर नेताओं को राजनीति से ऊपर उठना चाहिए।

उइके ने कहा, ‘‘जिस तरह से दो समुदायों -मेइती और कुकी के बीच नफरत और अविश्वास बढ़ गया है, मैं उसे खत्म करने का प्रयास कर रही हूं। मैंने दोनों समुदायों का प्रतिनिधित्व करने वाले संगठनों और विभिन्न राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों से मुलाकात की है, और शांति स्थापित करने में उनका सहयोग मांगा है। हमें राजनीति से ऊपर उठकर मणिपुर में शांति और सामान्य स्थिति सुनिश्चित करनी चाहिए।’’

अनुसूचित जनजाति (एसटी) का दर्जा देने की मेइती समुदाय की मांग के विरोध में पहाड़ी जिलों में तीन मई को आयोजित 'आदिवासी एकजुटता मार्च' के बाद मणिपुर में जातीय झड़पें हुई थीं, जिसमें 160 से अधिक लोगों की जान चली गई और कई लोग घायल हो गए।

मणिपुर की आबादी में मेइती लोगों की जनसंख्या लगभग 53 प्रतिशत है और वे ज्यादातर इम्फाल घाटी में रहते हैं। आदिवासी- नगा और कुकी - आबादी का 40 प्रतिशत हिस्सा हैं और ये पहाड़ी जिलों में रहते हैं।

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