देश की खबरें | मुंबई में सभी मेनहोल को सुरक्षात्मक ग्रिल से ढकने पर विचार क्यों नहीं: उच्च न्यायालय

मुंबई, 14 जून बंबई उच्च न्यायालय ने बुधवार को बृहन्मुंबई महानगरपालिका (बीएमसी) से पूछा कि वह दुर्घटनाओं को रोकने के लिए शहर के सभी मेनहोल को सुरक्षात्मक ग्रिल से ढकने पर विचार क्यों नहीं करती।

कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति नितिन जामदार और न्यायमूर्ति संदीप मार्ने की पीठ ने कहा कि 2018 में उच्च न्यायालय ने नगर निकाय को निर्देश दिया था कि यह सुनिश्चित करने के लिए कुछ तंत्र विकसित किया जाए कि शहर की सड़कों और फुटपाथ पर मेनहोल खुले न रहें।

अदालत ने तब यह भी सुझाव दिया था कि मेनहोल में सुरक्षात्मक ग्रिल लगाई जाएं, ताकि अगर कोई खुले मेनहोल से गिर जाए तो उसमें लगी ग्रिल व्यक्ति को नीचे न जाने दे।

न्यायाधीशों ने बुधवार को कहा कि शहर में 74,682 मेनहोल में से केवल 1,908 में सुरक्षात्मक ग्रिल लगाई गई हैं।

पीठ ने कहा, "उच्च न्यायालय का आदेश 2018 का है। पांच साल बीत चुके हैं और अभी तक हमारे पास सुरक्षात्मक ग्रिल से ढके दस प्रतिशत से भी कम मेनहोल हैं।"

अदालत ने कहा, "प्रथम दृष्टया, हमें कोई कारण नहीं मिला कि शहर के सभी मेनहोल में सुरक्षात्मक ग्रिल क्यों नहीं लगाई गई है।"

बीएमसी के वकील अनिल सखारे ने कहा कि जल भराव वाले इलाकों में मेनहोल के नीचे सुरक्षात्मक ग्रिल लगाई गई हैं।

अदालत ने, हालांकि, कहा कि खुले मेनहोल में किसी व्यक्ति या जानवर के गिरने की घटनाओं से बचने के लिए सभी मेनहोल में ग्रिल लगाई जानी चाहिए।

पीठ ने बीएमसी से कहा कि वह अपनी योजनाओं के बारे में 19 जून को सूचित करे।

उच्च न्यायालय अधिवक्ता रूजू ठक्कर द्वारा दायर एक याचिका पर सुनवाई कर रहा था। इसमें मुंबई में सभी प्रमुख सड़कों पर गड्ढों की मरम्मत करने और खराब सड़कों से संबंधित शिकायतों को दूर करने के लिए समान तंत्र तैयार करने का निर्देश देने वाले 2018 के अदालती आदेश को लागू करने में विफल रहने पर अधिकारियों के खिलाफ अवमानना ​​​​कार्रवाई का आग्रह किया गया था।

ठक्कर ने खुले मेनहोल पर चिंता जताते हुए एक अर्जी भी दायर की थी।

यह मामला तब उठा था जब अगस्त 2017 में वरिष्ठ उदर रोग विशेषज्ञ डॉ. दीपक अमरापुरकर दक्षिण मुंबई में जलमग्न सड़क पर चलने के दौरान एक खुले मेनहोल से गिरकर डूब गए थे।

अधिवक्ता सखारे ने बुधवार को अदालत को बताया कि नगर निकाय को जैसे ही मेनहोल खुले रहने की शिकायत मिलती है, उसके चारों ओर अवरोधक लगा दिए जाते हैं और मेनहोल को ढक दिया जाता है।

न्यायाधीशों ने कहा कि निकाय द्वारा शिकायत पर कार्रवाई करने से पहले कोई व्यक्ति अभी भी सीवर में गिर सकता है और मर सकता है।

अदालत ने पूछा, "सिर्फ जल भराव वाले क्षेत्रों में ही नहीं, बल्कि सभी मेनहोल में सुरक्षात्मक ग्रिल लगाने में क्या कठिनाई है? यदि ये ग्रिल खुले मेनहोल की समस्या का समाधान हैं तो इन्हें शहर के प्रत्येक मेनहोल में क्यों नहीं लगाया जाना चाहिए?"

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