मुंबई, 18 सितंबर बंबई उच्च न्यायालय ने शुक्रवार को महाराष्ट्र सरकार से कहा कि 2019 में शुरू की गई महात्मा ज्योतिराव फुले किसान ऋण माफी योजना से अब तक जिन किसानों को लाभ मिला है उनका विवरण पेश किया जाए।
न्यायमूर्ति के के तातेड़ की अध्यक्षता वाली पीठ ने राज्य सरकार से यह भी पूछा है कि सभी 35 लाख किसानों को इस योजना के दायरे में क्यों नहीं लाया गया।
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विधायक आशीष शेलार द्वारा दायर की गई जनहित याचिका में भी सरकार पर यही आरोप लगाया गया है।
याचिका में शेलार ने दावा किया है कि दो लाख रुपये तक का ऋण लेने वाले लगभग 35 लाख किसान इस योजना का लाभ लेने की अर्हता रखते हैं।
याचिका के अनुसार सरकार ने अभी तक केवल 15 लाख किसानों को ही ऋण माफी योजना का लाभ दिया है।
शिवसेना नीत महा विकास आघाडी सरकार द्वारा शुरू की गई योजना के अनुसार एक अप्रैल 2015 से 31 मार्च 2019 के बीच बैंक से दो लाख रुपये तक के ऋण लेकर 30 सितंबर 2019 तक लौटाने में असमर्थ रहे किसानों का पूरा कर्ज माफ कर दिया जाएगा।
याचिका में शेलार ने पूछा है कि कर्ज माफी का लाभ लेने की पात्रता रखने वाले सभी किसानों को इस योजना का लाभ क्यों नहीं दिया गया।
शेलार ने यह मुद्दा कई बार विधानसभा में भी उठाया है।
शेलार के वकील राजेंद्र पई ने शुक्रवार को अदालत को बताया कि संतोषजनक उत्तर न मिलने के कारण विधायक को उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाना पड़ा।
राज्य सरकार की वकील गीता शास्त्री ने जवाब देते हुए कहा कि शेलार इसके लिए सूचना के अधिकार के तहत एक आवेदन दे सकते थे।
शास्त्री ने कहा कि याचिका मीडिया की खबरों पर आधारित है।
पीठ ने पई से कहा कि उन्हें “खुद भी कुछ शोध करना चाहिए था।”
अदालत ने कहा कि राज्य सरकार को वांछित जानकारी देनी ही चाहिए।
पीठ ने कहा कि राज्य सरकार को अदालत को बताना होगा कि “क्यों केवल कुछ किसानों” को ही योजना का लाभ मिला।
अदालत ने राज्य को तीन सप्ताह के भीतर जवाब देने को कहा है।
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