देश की खबरें | पश्चिम बंगाल : पंचायत चुनाव को लेकर जारी हिंसा के बीच बेहद सुकून भरा है चतरा का माहौल

चतरा (पश्चिम बंगाल), सात जुलाई पश्चिम बंगाल में पंचायत चुनाव को लेकर जहां राजनीतिक दलों के कार्यकर्ता एक-दूसरे पर कीचड़ उछाल रहे हैं और आपस में संघर्ष कर रहे हैं, वहीं बांग्लादेश की सीमा पर स्थित चतरा गांव में माहौल एकदम शांत और सुकून भरा है। चतरा में भी पंचायत चुनावों के लिए तीनों मुख्य राजनीतिक दलों के बीच मुकाबला है लेकिन यहां का माहौल एकएम अलग है।

पूरे राज्य में शोर-शराबे वाले चुनाव प्रचार से उलट चतरा ग्राम पंचायत के मौजूदा भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) सदस्य और इस चुनाव में भी उम्मीदवार बृहस्पतिवार को चुनाव प्रचार समाप्त होने से महज कुछ घंटे पहले अपनी प्रतिद्वंद्वी पार्टी तृणमूल कांग्रेस के समर्थकों के साथ गांव के चौराहे पर गप्पें मारते हुए दिखे।

उत्तरी 24 परगना जिले के बदुरिया प्रखंड में स्थित यह गांव बांग्लादेश की सीमा से महज 10-15 किलोमीटर की दूरी पर है। यहां राजनीतिक नेताओं के आपसी संबंध इतने अच्छे हैं कि मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) उम्मीदवार ने तृणमूल कांग्रेस के एक नेता से इस पत्रकार की बातचीत करायी।

लेकिन, संबंधों के इस समीकरण के बावजूद माकपा उम्मीदवार सुब्रत बाला ने तृणमूल कांग्रेस पर हालात का फायदा उठाने का आरोप लगाया।

उन्होंने दावा किया, ‘‘2018 में चतरा पंचायत से जीत दर्ज करने वाली तृणमूल कांग्रेस ने कुछ ही लोगों का भला किया और बाकी लोगों को उनके हाल पर छोड़ दिया।’’

तृणमूल कांग्रेस के स्थानीय अध्यक्ष अपूर्ब रॉय ने कहा कि उसके पंचायत सदस्यों में कुछ ‘‘विश्वासघाती’’ भी हैं। उन्होंने कहा कि 26 सदस्यीय चतरा पंचायत में पार्टी ने 14 लोगों को टिकट दिया है जबकि इस बार छह लोगों को टिकट नहीं दिया गया है।

रॉय ने कहा कि पार्टी ने पंचायत चुनाव में कई पढ़े-लिखे लोगों को टिकट दिया है और ‘‘कुछ लोग लालची हो गए थे। पार्टी ऐसे व्यवहार का समर्थन नहीं करती और उनकी जगह नये चेहरों को मैदान में उतारा है।’’

भाजपा सदस्य बिनय बोराल ने कहा कि 2018 से अभी तक तृणमूल कांग्रेस नीत पंचायत में काम करने में कोई दिक्कत नहीं आयी है और यहां राजनीतिक मतभेदों से लोगों के व्यक्तिगत संबंध प्रभावित नहीं होते हैं।

यह पूछने पर कि चुनाव प्रचार कुछ ही घंटों में समाप्त होने वाला है, ऐसे में वह गप्पें मार रहे हैं, बोराल ने कहा, ‘‘...जरूरत क्या है, गांव के लोग मुझे और मेरा काम जानते हैं, फैसला अब उनके हाथों में है।’’

बोराल के बड़े भाई की पत्नी नीलिमा रॉय बोराल निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में उनके खिलाफ चुनाव लड़ रही हैं। वह 2018 में तृणमूल कांग्रेस उम्मीदवार के रूप में चुनाव हार गई थीं।

उन्होंने कहा, ‘‘अलग-अलग राजनीतिक निष्ठा के बावजूद परिवार के सदस्यों के बीच कोई मनमुटाव नहीं है।’’

चाय की दुकान चलाने वाले सुभाष दास का कहना है कि पिछले दशक में क्षेत्र में बहुत बदलाव हुए हैं।

उन्होंने कहा, ‘‘पहले हमें मानसून में घुटनों तक कीचड़ में चलना पड़ता था, लेकिन अब गांव में पक्की सड़कें बन गयी हैं, हमारे इलाके से गुजरने वाली मुख्य सड़क काफी चौड़ी और अच्छी है।’’

लेकिन स्थानीय बाजार में सब्जी बेचने वाले तृणमूल कांग्रेस कार्यकर्ता पारितोष मंडल अपनी पार्टी के नेतृत्व से खुश नहीं हैं। उन्होंने कहा, ‘‘मेरे परिवार को कुछ नहीं मिला है, जिनके पास मकान है, उन्हें ही मकान बनाने के लिए पैसे मिले।’’

माकपा उम्मीदवार बाला ने दावा किया कि 2013 और 2018 के पंचायत चुनावों में बुरी तरह हारने वाली वामपंथी पार्टी धीरे-धीरे मजबूत हो रही है। उन्होंने कहा, ‘‘हम भरोसे के साथ नहीं कह सकते कि इस बार यहां हमें जीत मिलेगी, लेकिन हमारी स्थिति जरूर मजबूत होगी।’’

अर्पणा अविनाश

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