कोलकाता, तीन दिसंबर पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने बृहस्पतिवार को चार लेन माझरहाट पुल का उद्घाटन किया और दावा किया कि इस परियोजना में नौ महीने की देरी हुयी है क्योंकि रेलवे जरूरी अनुमति देने के लिये बहुत समय ले लिया । इस पुल का एक हिस्सा दो साल पहले गिर गया था ।
ममता 26 नवंबर के विरोध प्रदर्शन के लिये भारतीय जनता पार्टी पर जमकर बरसीं और कहा कि यह जानते हुये कि पुल का काम पूरा हो गया है और कुछ ही दिनों में इसका उद्घाटन होना है, उनलोगों ने प्रदर्शन किया ।
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उन्होंने कहा, ''जिन लोगों ने कुछ दिन पहले इलाके में विरोध प्रदर्शन किया था क्या वह मीडिया में जा कर यह बतायेंगे कि रेलवे ने अपनी सहमति देने के लिये इतना समय क्यों लिया । पुल के नीचे अपनी संपत्ति के रखरखाव के लिये रेलवे ने राज्य सरकार ने 34 करोड़ रुपये क्यों लिये ।''
गौरतलब है कि बेहाला को दक्षिण कोलकाता से जोड़ने वाले इस पुल का एक हिस्सा 2018 में गिर गया था, जिससे इस घटना में तीन लोगों की मौत हो गयी थी ।
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मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि रेलवे ने उत्तर कोलकाता में जीर्ण शीर्ण हो चुके तल्ला पुल को गिराने के लिये 55 करोड़ रुपये लिये ।
ममता ने आरोप लगाया, ''कोलकाता पोर्ट ट्रस्ट ने भी माझरहाट पुल के लिये हमसे 77 लाख रुपये लिये । इन सभी रुपयों से हम स्कूल एवं कालेज बनवा सकते थे । अगर संभव हो तो कृपया वे रुपये लौटायें ।
उन्होंने कहा कि राज्य सरकार ने माझरहाट परियोजना पर 311.76 करोड़ रुपये खर्च किये हैं ।
विरोध प्रदर्शन के नाम पर राज्य में अशांति पैदा करने का भाजपा पर आरोप लगाते हुये ममता ने कहा, ''वे दावा करते हैं वह बेहाला के लोगों की दुर्दशा को सामने लाना चाहते हैं । क्या वे यह भी जानते हैं कि बेहाला में कितने वार्ड हैं । वहां कितने स्थानों पर दुर्गा पूजा होती है। बेहाला में कितने स्कूल, क्लब एवं संगठन हैं ।
उन्होंने कहा कि वह केवल शांति को भंग करना एवं दंगा भड़काना जानते हैं ।
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