नयी दिल्ली, 21 दिसंबर प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने बुधवार को दिल्ली उच्च न्यायालय को मौखिक आश्वासन दिया कि वह धन शोधन के एक मामले में तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के नेता अनुब्रत मंडल को यहां पेश करने के एक वारंट पर नौ जनवरी तक अमल नहीं करेगा।
इस आश्वासन पर न्यायमूर्ति जसमीत सिंह ने मंडल की याचिका को नौ जनवरी, 2023 के लिए सूचीबद्ध किया। पशु तस्करी मामले में पश्चिम बंगाल की आसनसोल जेल में बंद मंडल ने दिल्ली की निचली अदालत के पेशी वारंट को दिल्ली उच्च न्यायालय में चुनौती दी है। निचली अदालत ने इस प्रकरण से जुड़े धन शोधन मामले में उन्हें यहां पेश करने का आदेश दिया है।
न्यायाधीश ने ईडी से कहा, ‘‘ नौ जनवरी को फिर से सूचित करें, तब तक आप इस पर नहीं अमल करें।’’ मंडल की ओर से अधिवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी और मुदित जैन ने कहा कि यदि ईडी यह बयान देता है कि वह पेशी वारंट पर अभी अमल नहीं करेगा, तो अदालत इस याचिका को जनवरी में सूचीबद्ध कर सकती है।
इसके पहले दिन में न्यायमूर्ति अनूप जयराम भंभानी के समक्ष जब यह याचिका आई, तो उन्होंने इसे न्यायमूर्ति जसमीत सिंह की पीठ को स्थानांतरित कर दिया, क्योंकि मंडल के अधिवक्ता ने कहा कि न्यायमूर्ति सिंह के समक्ष अन्य संबद्ध मामले पहले से लंबित हैं।
तत्कालिकता का हवाला देते हुए अधिवक्ता ने अदालत से अनुरोध किया कि याचिका को बुधवार के लिए सूचीबद्ध किया जाये। अदालत ने उनके इस अनुरोध को स्वीकार कर लिया।
प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की याचिका पर यहां निचली अदालत की ओर से 19 दिसंबर को पेशी वारंट जारी किया गया था।
तृणमूल कांग्रेस की बीरभूम जिला इकाई के अध्यक्ष और मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के करीबी सहयोगी मंडल को इस मामले में केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) ने 11 अगस्त को गिरफ्तार किया था।
ईडी के मुताबिक, उसने सीबीआई की ओर से सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) के तत्कालीन कमांडर सतीश कुमार के खिलाफ कोलकाता में प्राथमिकी दर्ज किये जाने के बाद यह मामला दर्ज किया।
सीबीआई की प्राथमिकी में आरोप लगाया गया है कि कुमार और अन्य सरकारी अधिकारियों और निजी व्यक्तियों के साथ मंडल कई करोड़ रुपये के पशु तस्करी गिरोह में शामिल थे।
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