विदेश की खबरें | रूस में राष्ट्रपति चुनाव के लिए दूसरे दिन मतदान हुआ
श्रीलंका के प्रधानमंत्री दिनेश गुणवर्धने

उनके सामने कोई गंभीर चुनौती नहीं है। करीब 25 साल के अपने शासनकाल के दौरान उन्होंने राजनीतिक असंतोष को कुचल दिया है।

यह चुनाव स्वतंत्र मीडिया और प्रतिष्ठित अधिकार समूहों के दमन, पुतिन को राजनीतिक व्यवस्था पर पूर्ण नियंत्रण देने और यूक्रेन के खिलाफ मॉस्को के युद्ध के दो साल पूरे होने के बाद हुआ है। चुनाव ऐसे समय में हुआ है जब पुतिन के राजनीतिक विरोधी या तो जेल में हैं या विदेश में निर्वासित हैं। पुतिन के धुर विरोधी व सबसे मुखर विपक्षी नेता एलेक्सी नवलनी की फरवरी में आर्कटिक जेल में 47 वर्ष की आयु में मौत हो गई थी।

पुतिन के सामने तीन प्रतीकात्मक प्रतिद्वंद्वी हैं जिन्होंने उनकी या यूक्रेन पर रूस के हमले की कोई आलोचना नहीं की है।

पश्चिमी देशों के नेताओं ने इस चुनाव को लोकतंत्र का उपहास बताया है।

यूरोपीय परिषद के अध्यक्ष चार्ल्स माइकल ने कटाक्ष करते हुए शुक्रवार को पुतिन को चुनाव में “जबरदस्त जीत” की बधाई दी, जिसके लिए तकनीकी रूप से मतदान अभी जारी है।

उन्होंने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर लिखा, “न विपक्ष, न स्वतंत्रता, न विकल्प”।

इस बीच दिवंगत विपक्षी नेता नवलनी की अनुपस्थिति में उनकी टीम के सामने पुतिन के खिलाफ विपक्षी आंदोलन को बरकरार रखने की मुश्किल चुनौती है।

टीम के आंदोलन “नून अगेंस्ट पुतिन” को नवलनी की पत्नी यूलिया नवलनया का साथ मिला है।

नवलनया ने वीडियो संबोधन में कहा, “यह (आंदोलन) बहुत ही सरल एवं सुरक्षित क्रिया है, इस पर रोक नहीं लगाई जा सकती। इससे लाखों लोगों को अपने समान विचारधारा वाले सहयोगियों से रूबरू होने का मौका मिलेगा और यह एहसास करने में मदद मिलेगी कि हम अकेले नहीं हैं, ऐसे लोग हमारे साथ हैं जो युद्ध के खिलाफ हैं, भ्रष्टाचार के खिलाफ हैं और अराजकता के खिलाफ हैं।”

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