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Gujarat Elections-2022: BJP के सामने मध्य गुजरात में बढ़त बनाए रखने की चुनौती

गुजरात में 182 विधानसभा सीटों के करीब एक तिहाई या 61 सीटों वाले आठ जिलों में फैले मध्य क्षेत्र में आदिवासी और अत्यधिक शहरी इलाकों की मिश्रित संख्या है, जहां सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने 2017 के चुनावों में कांग्रेस पर अच्छी-खासी बढ़त हासिल की थी.

Gujarat Elections-2022: BJP के सामने मध्य गुजरात में बढ़त बनाए रखने की चुनौती
BJP Manifesto For Gujarat Elections (Photo Credit : BJP/Twitter)

अहमदाबाद, 30 नवंबर : गुजरात में 182 विधानसभा सीटों के करीब एक तिहाई या 61 सीटों वाले आठ जिलों में फैले मध्य क्षेत्र में आदिवासी और अत्यधिक शहरी इलाकों की मिश्रित संख्या है, जहां सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने 2017 के चुनावों में कांग्रेस पर अच्छी-खासी बढ़त हासिल की थी. राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि कांग्रेस के इस क्षेत्र से एक वरिष्ठ आदिवासी नेता के भाजपा में शामिल होने से इस बार वह बैकफुट पर दिखायी दे रही है. मध्य गुजरात क्षेत्र में भाजपा ने 2017 के चुनावों में 37 सीटें और कांग्रेस ने 22 सीटें जीती थीं जबकि दो सीटें निर्दलीयों के खाते में गयी थी. इस क्षेत्र में 10 सीटें अनुसूचित जनजाति (एसटी) तथा तीन अनुसूचित जाति (एससी) के उम्मीदवारों के लिए आरक्षित है.

भाजपा ने अहमदाबाद और वडोदरा के शहरी इलाकों में अपने मजबूत समर्थन से सीटों की संख्या बढ़ायी थी और ये दोनों क्षेत्र खेड़ा, आणंद और एसटी बहुल पंचमहल जिले के साथ अब भी उसके गढ़ बने हुए हैं. मध्य क्षेत्र के आठ जिलों दाहोद, पंचमहल, वडोदरा, खेड़ा, महीसागर, आणंद, अहमदाबाद और छोटा उदयपुर में से कांग्रेस बमुश्किल चार जिलों में ही दिखायी दी. भाजपा ने 2017 में दाहोद जिले में चार में से तीन सीट जीती थी, पंचमहल में पांच में से चार, वडोदरा में 10 में से आठ, खेड़ा में सात में तीन, महीसागर में दो में से एक, आणंद में सात में से दो, छोटा उदयपुर में तीन में से एक और अहमदाबाद में 21 में से 15 सीटें जीती थी. यह भी पढ़ें ; BJP का दावा- अर्थव्यवस्था के क्षेत्र में यूपीए की तुलना में हमारा प्रदर्शन बेहतर

अनुसूचित जनजाति (एसटी) आरक्षित सीटों पर विपक्षी दल का प्रदर्शन बहुत उत्साहजनक नहीं रहा था. उसने ऐसी 10 में से पांच सीटें जीती थी. चार सीटें भाजपा और एक निर्दलीय ने जीती थी. इस बार कांग्रेस बैकफुट पर दिखायी दे रही हैं क्योंकि आदिवासी समुदाय के उसके सबसे वरिष्ठ नेताओं में से एक और 10 बार के विधायक मोहन सिंह राठवा विधानसभा चुनाव से पहले भाजपा में शामिल हो गए. राठवा छोटा उदयपुर सीट से विधायक थे. बड़ौदा के महाराजा सयाजीराव विश्वविद्यालय में राजनीतिक विज्ञान के प्रोफेसर अमित ढोलकिया ने ‘पीटीआई-’ से कहा कि जहां तक आदिवासी सीटों का संबंध है तो नतीजों का अनुमान लगाना मुश्किल है लेकिन राठवा के कांग्रेस छोड़ने का निश्चित तौर पर असर पड़ेगा.

(The above story first appeared on LatestLY on Nov 30, 2022 12:50 PM IST. For more news and updates on politics, world, sports, entertainment and lifestyle, log on to our website latestly.com).