देश की खबरें | उपराष्ट्रपति धनखड़ ने पूर्व नौकरशाहों से भारत विरोधी विमर्श का मुकाबला करने को कहा

नयी दिल्ली, 13 मई उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने शनिवार को सेवानिवृत्त नौकरशाहों से आग्रह किया कि वे देश के संवैधानिक संस्थानों की छवि खराब करने की कोशिश करने वाले ‘‘झूठे और भारत विरोधी विमर्शों’’ का मुकाबला करने के लिए अपनी क्षमता का इस्तेमाल करें।

यहां एक पुस्तक विमोचन समारोह को संबोधित करते हुए धनखड़ ने यह भी कहा कि लोकतांत्रिक शासन की अपनी अनूठी चुनौतियां होती हैं। उन्होंने नौकरशाहों से कानून के शासन और संविधान के प्रति अटूट तथा दृढ़ प्रतिबद्धता प्रदर्शित करने का आह्वान किया।

उन्होंने विस्तार से बताए बिना कहा, ‘‘देश के कुछ हिस्सों में सत्तारूढ़ शासन के साथ अधिकारियों का राजनीतिक जुड़ाव संघवाद की प्रतिष्ठा को गंभीर रूप से प्रभावित कर रहा है। इस पर ध्यान दिए जाने की जरूरत है।’’

उपराष्ट्रपति ने कहा कि सेवानिवृत्त नौकरशाह भारत के संवैधानिक संस्थानों और लोकतांत्रिक मूल्यों को अनुचित रूप से कलंकित और धूमिल करने की कोशिश करने वाले ‘‘झूठे और राष्ट्र-विरोधी विमर्शों को बेअसर करने के लिए ‘‘प्रमुख रूप से तैनात’’ हैं। उन्होंने यह भी कहा कि राष्ट्र निर्माण में सेवानिवृत्त नौकरशाहों की भूमिका बहुत महत्वपूर्ण है।

उन्होंने कहा, ‘‘वे प्रतिभा, अनुभव के भंडार हैं और जानते हैं कि देश के लिए सबसे अच्छा क्या है। वे झूठे विमर्श का विश्लेषण करके हमेशा अपने मन की बात कहते हैं।’’

उपराष्ट्रपति ने कहा कि भारत का शासन प्रारूप, पारदर्शिता, जवाबदेही, डिजिटलीकरण, नवाचार और उद्यमशीलता पर केंद्रित है, जिससे दुनिया ईर्ष्या करती है। उन्होंने कहा, ‘‘सफल योजनाओं की वजह से कमजोर वर्गों का सशक्तिकरण और उत्थान हुआ है। यह सुनिश्चित करने का प्रयास हुआ है कि सबसे हाशिये पर रहने वाले नागरिकों की भी आवश्यक सेवाओं तक पहुंच हो।’’

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