रांची, तीन जुलाई झारखंड सरकार के श्रावण मास में देवघर स्थित वैद्यनाथ धाम एवं बासुकीनाथ मंदिरों को भक्तों के लिए खोलने तथा कांवर यात्रा को प्रारंभ करने में पूरी तरह असमर्थता व्यक्त करने पर शुक्रवार को राज्य उच्च न्यायालय ने इन मंदिरों को खोलने की अनुमति नहीं दी। हालांकि अदालत ने राज्य सरकार को भगवान वैद्यनाथ एवं बासुकीनाथ के आनलाइन दर्शन की व्यवस्था करने के निर्देश दिये।
झारखंड सरकार ने कहा कि वह इन मंदिरों को दर्शनों के लिए खोलने की स्थिति में नहीं है क्योंकि अभी इससे कोरोना संक्रमण फैलने की आशंका है।
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राज्य के आपदा प्रबन्धन सचिव अमिताभ कौशल ने अदालत के समक्ष ऑनलाइन उपस्थित होकर इस मामले में सरकार की स्थिति स्पष्ट की।
उच्च न्यायालय की मुख्य न्यायाधीश डा. रविरंजन एवं सुजीत नारायण प्रसाद की पीठ ने इस बात पर अप्रसन्नता व्यक्त की कि जब मामले में न्यायालय में सुनवाई चल रही थी और तो दो दिनों पूर्व मुख्यमंत्री ने कैसे यह आधिकारिक बयान जारी कर दिया कि वह यहां श्रावणी मेले और भगवान वैद्यनाथ मंदिर में दर्शन की अनुमति नहीं देंगे।
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राज्य के महाधिवक्ता ने इस पर न्यायालय से माफी मांगी और कहा कि वह सरकार को न्यायालय के रुख से अवगत करायेंगे और यह सुनिश्चित करने को कहेंगे कि आगे ऐसी गलती न हो।
उच्च न्यायालय ने राज्य सरकार को निर्देश दिया कि वह श्रावण के पहले
दिन से ही देवघर के वैद्यनाथ धाम और बासुकीनाथ मंदिरों में पूजा की उचित व्यवस्था करवायें और वहां से देश और विदेश के सभी भक्तों के लिए आनलाइन दर्शन की व्यवस्था की जाये।
इससे पूर्व राज्य सरकार ने न्यायालय को बताया कि राज्य में किसी भी
धार्मिक स्थल को अभी खोलने की अनुमति नहीं दी गयी है क्योंकि राज्य में कोरोना संक्रमण बढ़ने का खतरा है। उसने न्यायालय को बताया कि उत्तर प्रदेश, बिहार एवं अन्य स्थानों पर भी कांवड़ यात्रा की छूट नहीं दी गयी
है।
न्यायालय ने अपने आदेश का संबंधित भाग सुनाने के बाद कहा कि विस्तृत आदेश न्यायालय बाद में जारी करेगा और इसके साथ ही भाजपा के गोड्डा सांसद निशिकांत दूबे की जनहित याचिका को निस्तारित कर दिया।
भाजपा सांसद निशिकांत दूबे ने न्यायालय से याचिका में आग्रह किया था कि कुछ शर्तों के साथ श्रावणी मेले का आयोजन किया जाए। इसके जवाब में राज्य सरकार ने न्यायालय को बताया कि बड़े पैमाने पर होने वाले इस आयोजन में सामुदायिक रूप से कोरोना वायरस के फैलने
का खतरा है। बिहार सरकार ने इस मामले में अपना पल्ला झाड़ते हुए कहा कि यह पूरी तरह से झारखंड सरकार का मामला है।
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