अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन ने मैरीलैंड में ‘कैंप डेविड प्रेसिडेंशियल रिट्रीट’ में एक सम्मेलन के लिए शुक्रवार को दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति यून सुक योल और जापान के प्रधानमंत्री फुमियो किशिदा का स्वागत किये जाने के बीच ‘परामर्श दायित्व’ की नयी प्रतिबद्धता का ब्योरा सामने आया।
यह समझौता उन कई संयुक्त प्रयासों में एक है, जिसकी दिनभर के सम्मेलन के बाद ये नेता घोषणा कर सकते हैं। तीनों ही देश उत्तर कोरिया की ओर से बढ़ते परमाणु खतरे और प्रशांत क्षेत्र में चीन की आक्रामकता को लेकर बढ़ रही चिंता के बीच सुरक्षा और आर्थिक संबंधों को मजबूत करने पर विचार-विमर्श कर रहे हैं।
सम्मेलन के शुरू होने से तुरंत पहले बाइडन के सुरक्षा सलाहकार जेक सुलविन ने कहा, ‘‘ यह कहना काफी है कि यह बड़ा समझौता है।’’
बृहस्पतिवार को तोक्यो से रवाना होने से पहले किशिदा ने कहा था, ‘‘यह सियोल और वाशिंगटन के साथ त्रिपक्षीय रणनीतिक सहयोग को मजबूत करने का ऐतिहासिक अवसर होगा।’’ सम्मेलन शुरू होने से पहले चीन ने इस सम्मेलन की आलोचना की। चीन के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता वांग वेनबिन ने शुक्रवार को संवाददाता सम्मेलन में कहा, ‘‘अंतरराष्ट्रीय समुदाय का अपना फैसला है कि कौन अंतर्विरोध पैदा कर रहा है तथा तनाव बढ़ा रहा है।’’
उन्होंने कहा, ‘‘ विभिन्न विशिष्ट समूह एवं गुट बनाने तथा एशिया प्रशांत क्षेत्र में इन गुटों के बीच टकराव पैदा करने की कोशिश ठीक नहीं है और उससे निश्चित ही इस क्षेत्र के देशों में सतर्कता एवं विरोध बढ़ेगा।’’
सुलविन ने चीन की चिंताओं को दरकिनार कर दिया। उन्होंने कहा, ‘‘ यह स्पष्ट तौर पर प्रशांत क्षेत्र के लिए नाटो नहीं है।’’
उन्होंने कहा, ‘‘ यह साझेदारी किसी के खिलाफ नहीं है, बल्कि यह किसी और बात के लिए है। यह हिंद-प्रशांत क्षेत्र के लिए एक दिशादृष्टि है कि वह स्वतंत्र, खुला , सुरक्षित एवं समृद्ध हो।’’
बाइडन प्रशासन के एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार ‘परामर्श दायित्व’ संकल्प का मकसद इस बात को स्वीकार करना है कि तीनों देशों के ‘सुरक्षा माहौल मौलिक रूप से आपस में जुड़े हैं’ तथा एक देश को खतरा सभी के लिए खतरा’ है।
अधिकारी ने अपनी पहचान उजागर नहीं करने की शर्त पर यह बात कही।
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