एक नयी रिपोर्ट में यह बात कही गई है।
संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुतारेस ने कहा कि अमेरिका ने नवंबर 2019 और फरवरी 2020 में जिन वस्तुओं को जब्त किया ,उनमें से कुछ उन वस्तुओं से ‘‘मिलती जुलती अथवा समान’’ हैं जो सऊदी अरब पर 2019 में मिसाइल हमले और ड्रोन हमले के बाद वहां से मिली थीं।
गुतारेस ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद को सौंपी गयी एक रिपोर्ट में कहा कि अमेरिका ने यमन के अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र से जो चीजें बरामद की हैं वे न केवल ईरान की हैं बल्कि हो सकता है कि उन्हें 2015 के ईरान परमाणु समझौते के तहत परिषद के संकल्पों के असंगत तरीके से भेजा गया हो।
महासचिव ईरान को परमाणु हथियार बनाने से रोकने के मकसद से लाए गए 2015 के प्रस्ताव के क्रियान्वयन का जिक्र कर रहे थे। इसमें ईरान को किसी प्रकार के परमाणु और बैलेस्टिक मिसाइल की सामग्री और हथियारों को देने अथवा उससे लेने पर भी प्रतिबंध लगाया जाना शामिल है। यह प्रतिबंध 16 जून 2016 से प्रभावी हुआ था।
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सुरक्षा परिषद प्रस्तावों के अमल पर 30 जून को चर्चा करने वाली है और माना जा रहा है कि अमेरिका ईरान के खिलाफ संयुक्त राष्ट्र के हथियार प्रतिबंध को अनिश्चित काल तक के लिए बढ़ाने की मांग करेगा।
वहीं संयुक्त राष्ट्र में ईरान के मिशन ने शुक्रवार को इस रिपोर्ट पर कहा,‘‘ हथियारों या सऊदी अरब पर हमलों में इस्तेमाल उनके कलपुर्जों के निर्यात में ईरान से संबंध तथा अमेरिका द्वारा कथित तौर पर जब्त किए गए हथियारों को ईरानी मूल का बताने संबंधी रिपोर्ट को ईरान सिरे से खारिज करता है।’’
ईरानी मिशन ने अपने बयान में कहा कि संयुक्त राष्ट्र में, ‘‘इस प्रकार की जटिल और संवेदनशील जांच की क्षमता, विशेषज्ञता और ज्ञान नहीं है।’’
बयान में कहा गया कि रिपोर्ट में हू-ब-हू वहीं बातें लिखी हुईं हैं जिनका अमेरिका दावा करता है।
एपी
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