नयी दिल्ली, 30 जून कांग्रेस पार्टी ने शुक्रवार को समान नागरिक संहिता (यूसीसी) के मुद्दे पर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) पर हमला बोलते हुए आरोप लगाया कि वह लोगों को विभाजित करना और नफरत फैलाना चाहती है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा कुछ दिन पहले यूसीसी की वकालत किये जाने के बाद कांग्रेस ने यह प्रतिक्रिया व्यक्त की है।
मोदी ने भोपाल में मंगलवार को यूसीसी का जोरदार समर्थन करते हुए कहा था कि मुस्लिमों को संवदेनशील मुद्दों पर भड़काया जा रहा है।
यूसीसी सभी नागरिकों के लिए विवाह, तलाक, विरासत, रखरखाव और संपत्ति के उत्तराधिकार से संबंधित एक सामान्य कानून से संबंधित है।
कांग्रेस प्रवक्ता मीम अफजल ने कहा कि यह यूसीसी नहीं है, बल्कि ‘डीसीसी’ (डिवाइडिंग सिविल कोड) है जो देश की राजनीति को विभाजित करना चाहता है। उन्होंने कहा कि यूसीसी कोई एजेंडा नहीं है, बल्कि एजेंडा देश के लोगों को विभाजित करना है।
कांग्रेस प्रवक्ता मनीष तिवारी ने कहा, ‘‘ मेरी समझ से पर्सनल लॉ की समीक्षा का मतलब मौजूदा पर्सनल लॉ की समीक्षा है और समान नागरिक संहिता (यूसीसी) अभी तक कानून नहीं है।’’
विपक्षी दलों ने इस कदम को वर्ष 2024 के लोकसभा चुनाव से पहले समाज का ध्रुवीकरण करने वाला कदम बताया है। केरल के मुख्यमंत्री और वरिष्ठ माकपा नेता पिनराई विजयन ने आरोप लगाया कि यूसीसी के मुद्दे को उठाने के पीछे भाजपा का ‘चुनावी एजेंडा’ है और उन्होंने केंद्र सरकार से अनुरोध किया कि वह इसे लागू नहीं करे।
एक बयान में विजयन ने कहा कि केंद्र के कदम को केवल देश की सांस्कृतिक विविधता को मिटाकर ‘एक राष्ट्र, एक संस्कृति’ के बहुसंख्यक सांप्रदायिक एजेंडे को लागू करने की योजना के रूप में देखा जा सकता है।
विजयन ने कहा कि केंद्र सरकार और विधि आयोग को समान नागरिक संहिता लागू करने के कदम से पीछे हट जाना चाहिए।
महाराष्ट्र में भाजपा की सहयोगी पार्टी शिवसेना ने कहा है कि वह बालासाहेब ठाकरे के ‘एक राष्ट्र, एक कानून’ के दृष्टिकोण का समर्थन करती है और केंद्र से संसद के मानसून सत्र में यूसीसी पर चर्चा आयोजित करने की अपील करती है।
शिवसेना नेता और लोकसभा सांसद राहुल शेवाले ने हाल ही में ऐलान किया था कि उनकी पार्टी यूसीसी का पूर्ण रूप से समर्थन करती है। उन्होंने मुख्यमंत्री शिंदे से अनुरोध किया कि वह यूसीसी के समर्थन में आगामी मानसून सत्र में विधानसभा में एक प्रस्ताव पारित करके केंद्र सरकार को भेजें और बता दें कि महाराष्ट्र का इस मुद्दे पर क्या रुख है।
उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने प्रदेश में यूसीसी जल्द ही लागू किए जाने की बात कही। उनका यह बयान उत्तराखंड सरकार की ओर से गठित एक विशेषज्ञ समिति द्वारा मसौदा तैयार होने की जानकारी दिए जाने के बाद आया।
धामी ने ट्वीट कर कहा, ‘‘प्रदेश की जनता से किये गये वादे के अनुरूप आज 30 जून को समान नागरिक संहिता का मसौदा तैयार करने के लिए गठित समिति ने अपना काम पूरा कर लिया है। देवभूमि उत्तराखंड में जल्द ही यूसीसी लागू किया जाएगा।’’
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