न्यूयॉर्क/वाशिंगटन, 31 जुलाई अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने पाकिस्तान के साथ एक व्यापार समझौते पर हस्ताक्षर करने की घोषणा की है और कहा है कि अमेरिका “विशाल तेल भंडार” विकसित करने के लिए पाकिस्तान के साथ काम करेगा।
हालांकि अभी यह स्पष्ट नहीं हुआ है कि ट्रंप पाकिस्तान में किस विशाल तेल भंडार की बात कर रहे थे।
अमेरिकी राष्ट्रपति ने सोशल मीडिया पर यह भी सवाल उठाया कि क्या पाकिस्तान "कभी" भारत को तेल बेच सकता है।
ट्रंप ने बुधवार को ‘ट्रुथ सोशल’ पर एक पोस्ट में कहा, "हमने अभी-अभी पाकिस्तान के साथ एक समझौता किया है, जिसके तहत अमेरिका पाकिस्तान के विशाल तेल भंडार को विकसित करने के लिए मिलकर काम करेगा।"
उन्होंने कहा, "हम उस तेल कंपनी को चुनने की प्रक्रिया शुरू कर चुके हैं जो इस साझेदारी का नेतृत्व करेगी। कौन जानता है, शायद वे किसी दिन भारत को तेल बेचेंगे!"
पाकिस्तान लंबे समय से अपने अपतटीय क्षेत्र पर बड़े तेल भंडार होने का दावा करता रहा है, लेकिन इन भंडारों का दोहन करने में कोई प्रगति नहीं हुई है। वह इन भंडारों का दोहन करने के लिए निवेश आकर्षित करने की कोशिश कर रहा है।
देश फिलहाल अपनी ऊर्जा आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए पश्चिम एशिया से तेल आयात करता है।
पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ़ ने बृहस्पतिवार को सोशल मीडिया पर ट्रंप को इस "ऐतिहासिक" व्यापार समझौते के लिए धन्यवाद दिया और उम्मीद जताई कि इससे दोनों पक्षों के बीच सहयोग बढ़ेगा।
उन्होंने ‘एक्स’ पर लिखा, "मैं राष्ट्रपति ट्रंप डोनाल्ड ट्रंप को ऐतिहासिक अमेरिका-पाकिस्तान व्यापार समझौते को अंतिम रूप देने में नेतृत्वकारी भूमिका के लिए हार्दिक धन्यवाद देना चाहता हूं, जिसे कल रात वाशिंगटन में दोनों पक्षों ने सफलतापूर्वक संपन्न किया।"
उन्होंने कहा, "यह ऐतिहासिक समझौता हमारे बढ़ते सहयोग को और मज़बूत करेगा।”
रेडियो पाकिस्तान की खबर में कहा गया है कि यह समझौता पाकिस्तान के वित्त मंत्री मुहम्मद औरंगजेब, अमेरिकी वाणिज्य मंत्री हॉवर्ड लुटनिक और अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि राजदूत जैमीसन ग्रीर के बीच वाशिंगटन डीसी में हुई एक बैठक के दौरान हुआ।
खबर के मुताबिक, "इस समझौते के परिणामस्वरूप, विशेष रूप से अमेरिका को किए जाने वाले पाकिस्तानी निर्यात पर पारस्परिक शुल्क में कमी आएगी। यह समझौता विशेष रूप से ऊर्जा, खनन और खनिज, आईटी, क्रिप्टोकरेंसी और अन्य क्षेत्रों में आर्थिक सहयोग के एक नए युग की शुरुआत का प्रतीक है।"
इससे कुछ घंटे पहले ट्रंप ने भारत से आने वाले सभी सामान पर 25 प्रतिशत शुल्क लगाने तथा रूसी सैन्य उपकरणों व ईंधन की खरीद को लेकर भारत पर अतिरिक्त जुर्माना लगाने की घोषणा की थी।
सोशल मीडिया पर एक पोस्ट में ट्रंप ने भारत की व्यापार नीतियों को "अत्यंत कठोर व फिजूल" बताया।
ट्रंप ने कहा, "सब कुछ ठीक नहीं है! इसलिए भारत को एक अगस्त से 25 प्रतिशत शुल्क और उपरोक्त के लिए जुर्माना देना होगा।"
इससे पहले दिन में उन्होंने कई बार भारत द्वारा लगाए गए शुल्क के बारे में बात की और ब्रिक्स (ब्राजील, रूस, भारत, चीन और दक्षिण अफ्रीका) समूह में भारत की सदस्यता का उल्लेख किया। उन्होंने ब्रिक्स को "अमेरिका विरोधी" बताया।
भारत के साथ बातचीत को लेकर एक सवाल के जवाब में ट्रंप ने कहा कि अमेरिका भारत से बात कर रहा है।
उन्होंने कहा, "...देखते हैं, हम अभी भारत के साथ बातचीत कर रहे हैं।"
उन्होंने भारत के शुल्क को "दुनिया के सबसे ज़्यादा शुल्क में से एक" बताया।
वहीं भारत ने कहा कि उसने द्विपक्षीय व्यापार को लेकर ट्रंप के बयान पर "ध्यान दिया" है और सरकार इसके प्रभावों का अध्ययन कर रही है।
एक बयान में कहा गया, "भारत और अमेरिका पिछले कुछ महीनों से एक निष्पक्ष, संतुलित और पारस्परिक रूप से लाभकारी द्विपक्षीय व्यापार समझौते पर बातचीत कर रहे हैं। हम इसके लिए प्रतिबद्ध हैं।"
ट्रंप ने शुल्क लागू करने की तारीख एक अगस्त तय की है।
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