देश की खबरें | मछली उत्पादन बढ़ाने के लिए त्रिपुरा सरकार करा रही राज्यव्यापी सर्वे

अगरतला, 14 जून त्रिपुरा में मछली उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए मत्स्य पालन विभाग ने अप्रयुक्त जल निकायों की पहचान करने के लिए एक राज्यव्यापी सर्वेक्षण किया है ताकि उन्हें विकसित कर मछली पालन किया जा सके।

प्रदेश सरकार के एक मंत्री ने बुधवार को इसकी जानकारी दी।

पूर्वोत्तर के इस राज्य में मछली की व्यक्तिगत खपत हर साल औसतन 19 किलोग्राम है। यह राज्य सालाना 8,284 मीट्रिक टन मछली का उत्पादन करता है जबकि इसकी वार्षिक मांग 1,11,714 मीट्रिक टन है।

मछली की कमी को पश्चिम बंगाल, आंध्र प्रदेश और पड़ोसी देश बांग्लादेश से पूरा किया जाता है।

वर्तमान में राज्य में मछली उत्पादन के लिए 37,957 हेक्टेयर में फैले सक्रिय जल निकाय हैं। करीब 100 हेक्टेयर क्षेत्र मं फैले जल निकायों में मछली पालन विकसित करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।

प्रदेश के मत्स्य पालन मंत्री सुधांगशु दास ने यहां एक संवाददाता सम्मेलन में कहा, ‘‘जनसंख्या में वृद्धि और अन्य कारकों के कारण त्रिपुरा में मछली की मांग 2016-17 में 96,454 मीट्रिक टन से बढ़कर 2022-23 में 1,11,714 मीट्रिक टन हो गई है।’’

उन्होंने कहा कि इसी तरह, मछली उत्पादन भी 72,271 मीट्रिक टन से बढ़कर 82,084 मीट्रिक टन हो गया है।

उन्होंने कहा, ‘‘समीक्षा बैठकों के दौरान यह बात सामने आयी कि कई जलाशय हैं जिनका इस्तेमाल मछली पालन के लिए नहीं किया जा रहा है। यदि अप्रयुक्त जल निकायों को ठीक कर दिया जाता है तो राज्य में मछली उत्पादन दोगुना होने की संभावना है।’’

विभाग ने राज्य के बाहर से मछली आपूर्ति पर निर्भरता को कम करने के लिए राज्य में मछली उत्पादन बढ़ाने के लिए पहले ही कई कदम उठाए हैं।

सर्वेक्षण के लिए संसाधनों की कमी को एक बाधा मानते हुए दास ने कहा कि वह पहले ही केंद्र के साथ आर्थिक मदद का मुद्दा उठा चुके हैं।

उन्होंने कहा, ‘‘एक बार सर्वेक्षण पूरा हो जाने के बाद, एक व्यापक योजना तैयार की जाएगी और वित्तीय सहायता के लिए केंद्र को भेजी जाएगी।’’

दास ने बांग्लादेश, पश्चिम बंगाल और आंध्र प्रदेश से प्राप्त मछलियों की गुणवत्ता पर भी चिंता व्यक्त की।

उन्होंने कहा, ‘‘आंध्र प्रदेश से अगरतला तक सड़क मार्ग से मछली पहुंचाने में काफी समय लगता है। वे लंबी यात्रा के दौरान मछली को संरक्षित करने के लिए रसायनों का उपयोग कर सकते हैं। हमें नहीं पता कि राज्य के बाहर से आने वाली मछली खपत के लिए सुरक्षित है या नहीं। अगर हमारा राज्य मछली उत्पादन बढ़ाता है तो इन मुद्दों को हल किया जा सकता है और हम इस पर काम कर रहे हैं।’’

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