नयी दिल्ली, नौ जून मुख्य चुनाव आयुक्त (सीईसी) राजीव कुमार ने शुक्रवार को कहा कि योग्य प्रवासी भारतीय मतदाताओं को यहां चुनाव में भाग लेने की अनुमति देने के लिए ई-डाक मतपत्र जैसे प्रौद्योगिकी आधारित तरीकों का इस्तेमाल करने का समय आ गया है।
उन्होंने यह भी कहा कि 1952 से विश्वसनीय तरीके से चुनाव प्रक्रिया का आयोजन भारत की व्यापक राष्ट्रीय शक्ति की विश्वव्यापी स्वीकृति का एक महत्वपूर्ण घटक है।
कुमार ने यहां निर्वाचन सदन में 2022 बैच के भारतीय विदेश सेवा के प्रशिक्षु अधिकारियों को ‘‘भारत-लोकतंत्र की माता और निर्वाचन आयोग की भूमिका’’ विषय पर संबोधित करते हुए यह बात कही।
स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनावों के संबंध में चुनाव प्रबंधन निकायों द्वारा सामना की जा रही आम चुनौतियों पर मुख्य चुनाव आयुक्त ने सोशल मीडिया पर फर्जी खबरों से बढ़ते खतरे का जिक्र किया।
सूत्रों के अनुसार, प्रवासी मतदाताओं द्वारा मतदान के बारे में पूछे जाने पर, कुमार ने कहा कि समय आ गया है जब दुनिया की पांचवीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था ने पात्र प्रवासी भारतीय मतदाताओं को इलेक्ट्रॉनिक ट्रांसमिटेड डाक मतपत्र प्रणाली (ईटीबीपीएस) के माध्यम से चुनाव में भागीदारी के लिए प्रौद्योगिकी-संचालित पद्धति का इस्तेमाल किया है।
सरकार ने इस साल मार्च में राज्यसभा को बताया था कि प्रवासी भारतीय मतदाताओं के लिए ईटीपीबीएस की सुविधा के संबंध में निर्वाचन आयोग के प्रस्ताव पर विदेश मंत्रालय के साथ विचार-विमर्श किया जा रहा है ताकि इसके क्रियान्वयन में शामिल चुनौतियों को दूर किया जा सके।
इस साल एक जनवरी को प्रवासी मतदाताओं की कुल संख्या 1.15 लाख से अधिक थी। कुमार ने यह भी कहा कि लोकतंत्र पर हमलों को लेकर दुनिया भर में बढ़ती चिंता के बीच निर्वाचन आयोग द्वारा लगातार विश्वसनीय चुनावी प्रक्रिया का आयोजन लोकतांत्रिक संस्थाओं की ताकत और लचीलेपन को प्रदर्शित करता है।
सीईसी ने दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र में चुनाव कराने से जुड़ी जटिलता पर भी अपने विचार व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि 10 लाख से अधिक मतदान केंद्र और एक करोड़ से अधिक निर्वाचन अधिकारी एक समावेशी, सुलभ, सहभागी और तकनीक-संचालित चुनाव सुनिश्चित करते हैं।
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