कोलंबो, 21 अप्रैल श्रीलंका में 2019 में ईस्टर के अवसर पर हुए बम धमाकों के पीड़ितों के लिये इंसाफ की मांग को लेकर शुक्रवार को यहां काले व सफेद कपड़े पहनकर हजारों लोगों ने प्रदर्शन किया।
इस बम धमाके में 11 भारतीयों समेत करीब 270 लोगों की मौत हो गई थी।
आईएसआईएस से जुड़े स्थानीय इस्लामी चरमपंथी समूह नेशनल तौहीद जमात से जुड़े नौ आत्मघाती हमलावरों ने 21 अप्रैल, 2019 को तीन कैथोलिक चर्चों और कई लग्जरी होटलों में सिलसिलेवार धमाकों को अंजाम दिया, जिसमें 270 से अधिक लोग मारे गए और 500 से अधिक घायल हुए थे।
बम विस्फोटों से देश में एक राजनीतिक तूफान खड़ा हो गया था। तत्कालीन राष्ट्रपति मैत्रीपाला सिरिसेना और प्रधानमंत्री रानिल विक्रमसिंघे को पूर्व खुफिया जानकारी उपलब्ध होने के बावजूद हमलों को रोकने में असमर्थता के लिए दोषी ठहराया गया था।
बम हमलों की चौथी बरसी पर शुक्रवार को कैथोलिक पादरियों सहित हजारों लोग मौन विरोध के लिए कतार में खड़े थे।
उन्होंने सरकार पर पीड़ितों को न्याय दिलाने के लिए पर्याप्त कदम नहीं उठाने का आरोप लगाया। काले और सफेद कपड़े पहने प्रदर्शनकारियों ने एक दूसरे का हाथ पकड़ मानव श्रृंखला बना रखी थी।
स्थानीय समयानुसार सुबह पौने नौ बजे पीड़ितों के लिये दो मिनट का मौन रखा गया।
विरोध प्रदर्शन में सबसे आगे रहे कार्डिनल मैलकम रंजीत के नेतृत्व में चर्च ने जांच एजेंसियों पर लीपा-पोती का आरोप लगाया।
कार्डिनल ने कहा, “राष्ट्रपति सिरिसेना और उनके प्रतिष्ठान की पूरी तरह जांच होनी चाहिए।”
उन्होंने सिरिसेना द्वारा जांच के लिए नियुक्त राष्ट्रपति समिति की सिफारिशों के पूर्ण कार्यान्वयन का आह्वान किया।
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