जम्मू/श्रीनगर, 31 अगस्त जम्मू-कश्मीर के राजनीतिक दलों ने बृहस्पतिवार को आरोप लगाया कि राज्य का दर्जा बहाल करने और जम्मू-कश्मीर में विधानसभा चुनाव कराने पर उच्चतम न्यायालय में केंद्र के रुख में कोई नयी बात नहीं है, बल्कि ये सिर्फ ध्यान भटकाने वाली रणनीति है।
नेशनल कॉन्फ्रेंस ने सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता द्वारा शीर्ष अदालत में दी गई दलीलों को केंद्र के पांच अगस्त, 2019 के फैसलों की वैधता को चुनौती देने के मुख्य मुद्दे से ध्यान हटाने की रणनीति बताया।
वहीं, अन्य राजनीतिक दलों ने कहा कि दलीलें ‘‘भ्रामक और हास्यास्पद’’ हैं तथा केंद्र के पिछले कुछ वर्ष पुराने रुख के ही समान हैं।
केंद्र ने बृहस्पतिवार को उच्चतम न्यायालय से कहा कि जम्मू-कश्मीर में चुनाव ‘‘अब किसी भी समय’’ हो सकते हैं, क्योंकि मतदाता सूची पर अधिकांश काम पूरा हो चुका है, और इसके लिए विशिष्ट तारीखों का फैसला करना निर्वाचन आयोग पर निर्भर है।
शीर्ष अदालत की पांच न्यायाधीशों की संविधान पीठ वर्तमान में उन याचिकाओं की समीक्षा कर रही है, जिन्होंने अनुच्छेद 370 को निरस्त करने को चुनौती दी है।
नेशनल कॉन्फ्रेंस के प्रवक्ता इमरान नबी डार ने कहा कि उनकी पार्टी जम्मू-कश्मीर के लोगों के लोकतांत्रिक अधिकारों की बहाली की वकालत करती रहेगी, जिसमें विधानसभा चुनाव कराना भी शामिल है।
डार ने श्रीनगर में पीटीआई- से कहा, ‘‘हम चुनाव की मांग को लेकर उच्चतम न्यायालय नहीं गए थे। हमारी मूल याचिका पांच अगस्त, 2019 को लिए गए एकतरफा और असंवैधानिक फैसलों के खिलाफ है। सॉलिसिटर जनरल ने उच्चतम न्यायालय की पीठ को जो बताया है, वह मुख्य मुद्दे (पांच अगस्त का निर्णय) से ध्यान भटकाने की रणनीति है और हम खुद को उसी तक सीमित रखेंगे।’’
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