देश की खबरें | शीर्ष अदालत ने मप्र उच्च न्यायालय से कहा: पूर्व महिला न्यायिक अधिकारी को पुन: बहाल करने की याचिका पर विचार करे

नयी दिल्ली, 14 जुलाई उच्चतम न्यायालय ने मंगलवार को मप्र उच्च न्यायालय से कहा कि यौन उत्पीड़न के आरोप लगाने वाली पूर्व महिला न्यायिक अधिकारी की पुन: नियुक्ति के मसले पर विचार करे। इस महिला न्यायिक अधिकारी ने उच्च न्यायालय के न्यायाधीश के खिलाफ यौन उत्पीड़न के आरोप लगाये थे और बाद में अपने पद से इस्तीफा दे दिया था।

प्रधान न्यायाधीश एस ए बोबडे, न्यायमूति आर सुभाष रेड्डी और न्यायमूर्ति ए एस बोपन्ना की पीठ ने कहा कि वह इस न्यायिक अधिकारी की नियुक्ति के मामले में पुन: विचार करने के लिये उच्च न्यायालय से ‘जोरदार सिफारिश’ करेगा।

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पीठ ने इस पूर्व न्यायिक अधिकारी की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता इन्दिरा जयसिंह को भरोसा दिलाया कि अगर पुन: विचार करने के इस आदेश का कोई नतीजा नहीं निकला तो वह उसकी याचिका पर सुनवाई करेगी।

शीर्ष अदालत ने 12 फरवरी को कहा था कि वह इस पूर्व महिला अधिकारी को फिर से नियुक्त करने पर विचार कर सकता हैं। साथ ही उसने उच्च न्यायालय से इस मामले में एक बार फिर गौर करने के लिये कहा था।

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उच्च न्यायालय की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता रवीन्द्र श्रीवास्तव ने कहा कि इस पूर्व अधिकारी की पुन: नियुक्ति का मामला इस साल फरवरी में तीसरी बार पूर्ण पीठ के समक्ष रखा गया था जिसने इसे अस्वीकार कर दिया।

श्रीवास्तव ने कहा, ‘‘वह मप्र में वरिष्ठता के साथ बहाली और फिर तबादला चाहती हैं। अदालत के सभी सदस्यों की बैठक ने कहा कि 2014 उसका इस्तीफा स्वीकार करने का निर्णय अंतिम था।

पीठ ने सवाल किया, ‘‘उच्च न्यायालय हमारे सुझाव पर विचार क्यों नहीं करना चाहता। आप (वकील) हमारा दृष्टिकोण संप्रेषित करें। पीठ ने इसके साथ ही इस मामले की सुनवाई चार सप्ताह के लिये स्थगित कर दी ताकि संबंधित पक्षकार इस मामले में कोई निर्णय लेकर उसे अवगत करा सकें।

इससे पहले, मप्र उच्च न्यायालय ने शीर्ष अदालत से कहा था कि इस पूर्व महिला न्यायिक अधिकारी को बहाल नहीं किया जा सकता है।

इस महिला न्यायिक अधिकारी ने उच्च न्यायालय के न्यायाधीश के खिलाफ यौन उत्पीड़न के आरोप लगाये थे। इस महिला न्यायिक अधिकारी के आरोपों की जांच के लिये राज्य सभा ने एक समिति गठित थी जिसने दिसंबर, 2017 में न्यायाधीश को पाकसाफ करार दिया था।

इन्दिरा जयसिंह ने वीडियो कांफ्रेन्सिग के माध्यम से सुनवाई के दौरान पीठ से कहा कि वह इस मामले में जल्द सुनवाई का अनुरोध कर रही हैं क्योंकि उनकी मुवक्किल जल्द काम शुरू करना चाहती है और उसे वरिष्ठता के साथ ही किसी अन्य राज्य में तैनात कर दिया जाना चाहिए।

उच्च न्यायालय के वकील ने कहा कि यह स्वेच्छा से त्याग पत्र देने का मामला है जिसे 2014 में स्वीकार कर लिया गया था। उन्होंने कहा कि नौकरी के साथ ही यह पूर्व महिला अधिकारी वरिष्ठता भी चाहती है।

पीठ ने श्रीवास्तव को सुझाव दिया कि नयी नियुक्ति के रूप में इस पर विचार किया जा सकता है। जयसिंह ने इस सुझाव का विरोध किया।

उन्होंने कहा, ‘‘उसकी 2011 में सीधे भर्ती हुयी थी। मुझे उसकी उम्र ध्यान नहीं लेकिन वह उच्च न्यायालय और फिर उच्चतम न्यायालय की न्यायाधीश बनना चाहती है। मैं कैसे उससे कहूं कि वह अपनी महत्वाकांक्षाओं का त्याग कर दे।’’

पीठ के इस सवाल पर कि अगर काम करना उसकी प्राथमिकता है तो उसे वरिष्ठता का दावा छोड़ देना चाहिए, जयसिंह ने कहा, ‘‘वह 48 साल की है, अब कैसे वह एकदम नीचे से शुरूआत कर सकती है।’’

इससे पहले, शीर्ष अदालत ने मप्र उच्च न्यायालय से कहा था कि वह इस पूर्व महिला न्यायिक अधिकारी को चार सप्ताह के भीतर बहाल करने की संभावना पर विचार करे।

इस महिला ने मप्र उच्च न्यायालय के 11 जनवरी, 2017 के प्रशासनिक आदेश के खिलाफ शीर्ष अदालत में याचिका दायर कर रखी है। उच्च न्यायालय ने उसे फिर से बहाल करने के लिये दायर उसका आवेदन खारिज कर दिया था।

अनूप

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