देश की खबरें | दक्षिणी भारत के प्रमुख नेताओं ने कहा, ‘परिसीमन की कवायद गैर-भाजपा शासित राज्यों पर योजनाबद्ध हमला’

चेन्नई, 22 मार्च तमिलनाडु के उपमुख्यमंत्री उदयनिधि स्टालिन ने शनिवार को कहा कि केंद्र द्वारा प्रस्तावित परिसीमन महज आंकड़ों का खेल नहीं बल्कि संसद में गैर-भाजपा (भारतीय जनता पार्टी) शासित राज्यों का प्रतिनिधित्व कम करने के लिए उन पर एक सुनियोजित हमला है।

मुख्यमंत्री एम के स्टालिन द्वारा यहां निष्पक्ष परिसीमन पर बुलाई गई पहली संयुक्त कार्रवाई समिति की बैठक को संबोधित करते हुए उदयनिधि ने कहा कि उच्च जन्म दर वाले राज्यों को अधिक सीटें मिलने का मतलब है कि संसद में दक्षिण की आवाज को दबाना।

उन्होंने कहा, “अगर हमें सराहा नहीं जा सकता तो कम से कम दंडित तो नहीं किया जाना चाहिए। यह कदम संघीय ढांचे के लिए प्रत्यक्ष खतरा है। इसलिए हमें जल्द से जल्द और मिलकर काम करना चाहिए। हमें 1971 की जनगणना के आधार पर लोकसभा सीटों पर रोक को 2026 से आगे बढ़ाने की मांग करनी चाहिए।”

उपमुख्यमंत्री ने कहा कि इसके अलावा परिसीमन प्रक्रिया से प्रभावित होने वाले राज्यों को इस बात पर जोर देना चाहिए कि लोकसभा में प्रत्येक राज्य का वर्तमान आनुपातिक प्रतिनिधित्व बरकरार रखा जाए, भले ही सीटों की संख्या बढ़ाई जाए या नहीं।

उदयनिधि ने कहा, “यह किसी एक राज्य के नहीं बल्कि भारत में लोकतंत्र के भविष्य के बारे में है। इसलिए, हमें एक साथ खड़े होना चाहिए। हमें अपनी आवाज उठानी चाहिए। हमें एक निष्पक्ष परिसीमन प्रक्रिया के लिए लड़ना चाहिए, जो हमारे प्रतिनिधित्व की रक्षा करे और भविष्य की पीढ़ियों के लिए न्याय सुनिश्चित करे।”

भारत राष्ट्र समिति (बीआरएस) के कार्यकारी अध्यक्ष केटी रामा राव ने शनिवार को आरोप लगाया कि परिसीमन की मौजूदा नीति ‘दक्षिणी राज्यों के भविष्य के लिए खतरा’, उनके आर्थिक योगदान, शासन उपलब्धियों और लोकतांत्रिक प्रतिनिधित्व को कमजोर कर रही है।

चेन्नई में स्टालिन द्वारा बुलाई गई लोकसभा निर्वाचन क्षेत्रों के परिसीमन पर बैठक में शामिल हुए राव ने केंद्र की राष्ट्रीय जनतांत्रिक सरकार (राजग) सरकार पर दशकों से ‘क्षेत्र के खिलाफ भेदभाव’ जारी रखने का आरोप लगाया।

उन्होंने दावा किया कि जनसंख्या के आधार पर मौजूदा परिसीमन नीति से धन और राजकोषीय नियंत्रण का केंद्रीकरण हो सकता है, जिससे दक्षिणी राज्यों की प्रगति ‘खतरे में’ पड़ सकती है।

राव ने कहा, “भारत एक लोकतांत्रिक देश है लेकिन यह विविध पहचानों और संस्कृतियों का एक संघ भी है, जिसे हमें यह नहीं भूलना चाहिए।”

उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार को ‘लोकतंत्र को सत्तावादी भीड़तंत्र में बदलने से बचाने के लिए’ परिसीमन पर अपने दृष्टिकोण पर पुनर्विचार करना चाहिए।

कर्नाटक के उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने कहा कि ‘केवल जनसंख्या के आधार पर’ प्रस्तावित परिसीमन के कारण संघीय लोकतंत्र खतरे में है।

उन्होंने परिसीमन की प्रक्रिया को जनसंख्या वृद्धि को नियंत्रित करने, साक्षरता में सुधार लाने और महिलाओं को सशक्त बनाने के लिए दक्षिणी राज्यों पर एक राजनीतिक हमला करार दिया।

शिवकुमार ने चेन्नई में परिसीमन पर बैठक के दौरान कहा, “हमारे लोकतंत्र की नींव संघवाद है, जो खतरे में है। बाबासाहेब आंबेडकर और हमारे संविधान के दूरदर्शी निर्माताओं द्वारा स्थापित हमारे संघीय लोकतंत्र के स्तंभों को ईंट दर ईंट तोड़ा जा रहा है।”

उपमुख्यमंत्री शिवकुमार ने कहा, “कर्नाटक, तमिलनाडु और इस कमरे में मौजूद हर प्रगतिशील राज्य के सामने एक कठिन विकल्प है प्रभुत्व के आगे झुकना या फिर प्रतिरोध को बढ़ाना। हम प्रतिरोध का विकल्प चुनते हैं।”

उन्होंने आरोप लगाया कि केवल जनसंख्या के आधार पर प्रस्तावित परिसीमन न केवल एक तकनीकी समायोजन है बल्कि दक्षिणी राज्यों पर एक तरह का राजनीतिक हमला भी है, क्योंकि यह जनसंख्या वृद्धि को नियंत्रित करने, साक्षरता में सुधार करने और महिलाओं को सशक्त बनाने में उनकी सफलता के लिए दंडित करने जैसा है।

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