कोटा (राजस्थान), 18 जुलाई बूंदी में हाल ही में अधिसूचित रामगढ़ विषधारी बाघ अभयारण्य में एक मादा बाघ को संरक्षित क्षेत्र में स्थानांतरित कर दिया गया है, जहां एक अकेला बाघ दो साल से रह रहा है।
रणथंभौर शेर अभयारण्य (आरटीआर) की परिधि में घूम रही बाघिन टी-102 को शनिवार तड़के बेहोश कर पकड़ लिया गया।
उप वन संरक्षक एवं क्षेत्र निदेशक (प्रथम) रणथंभौर बाघ परियोजना, सवाईमाधोपुर के अनुसार, बाघिन की चिकित्सकीय जांच के बाद, इसे रामगढ़ विषधारी बाघ अभयारण्य (आरवीटीआर) में छोड़ा गया, जहां नर बाघ टी-115 ने पिछले दो वर्षों से डेरा डाला हुआ है।
अधिकारियों का कहना है कि मादा बाघ असुरक्षित क्षेत्र में घूम रही थी, उसके स्थानांतरण से संरक्षण के प्रयासों को बढ़ावा मिलेगा। स्थानीय लोग उम्मीद कर रहे हैं कि दो बाघों के मिलने से रामगढ़ अभयारण्य में इस प्रजाति की आबादी बढ़ने में मदद मिलेगी।
अधिकारियों ने बताया, लगभग 15 नर और मादा बाघों की सुरक्षा के लिए स्थानांतरण के प्रयास किए जा रहे हैं, जो वर्तमान में आरटीआर की परिधि में घूम रहे हैं।
उप वन संरक्षक, आरवीटीआर, संजीव शर्मा ने रविवार को कहा, “रविवार सुबह आरवीटीआर में रामगढ़ किले के पास बाघिन-102 को देखा गया ,वह स्वस्थ है और बाड़े में बाघिन की कड़ी निगरानी की जा रही है, जहां इसे अगले आठ-10 दिनों तक रखा जाएगा।’’
लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने बाघिन के स्थानांतरण पर अपने संसदीय क्षेत्र के लोगों को बधाई देते हुए कहा कि मुकुंदरा हिल्स बाघ अभयारण्य और आरवीटीआर के बाघ अभयारण्य हाड़ौती के समग्र विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।
बिरला ने यहां एक प्रेस विज्ञप्ति में कहा कि उन्होंने हाल ही में नयी दिल्ली में हुई एक बैठक में वन अधिकारियों से एमएचटीआर और आरवीटीआर में बाघ को छोड़ने के लिए कहा था।
राजस्थान के युवा मामलों और खेल मंत्री अशोक चंदना ने कहा कि यह खुशी का क्षण है क्योंकि इससे बाघ संरक्षण के प्रयासों में इजाफा होगा।
फाल्गुनी
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