विदेश की खबरें | नेशनल पार्टी न्यूजीलैंड के स्कूलों में पठन-पाठन के तरीके को बदलना चाहती है
श्रीलंका के प्रधानमंत्री दिनेश गुणवर्धने

पामर्स्टन नॉर्थ, 18 सितंबर (द कन्वरसेशन) न्यूजीलैंड के चुनाव में यदि नेशनल पार्टी विजयी रही तो उसने देश की पूरी शिक्षा प्रणाली और पठन पाठन की शैली को बदलने की कसम खाई है। इस शिक्षा परिवर्तन में सभी वर्ष 0-6 कक्षाओं में ‘‘संरचित साक्षरता’’ के शिक्षण की आवश्यकता की प्रतिज्ञा शामिल है।

शिक्षा क्षेत्र से जुड़े कई लोगों के लिए यह घोषणा स्वागतयोग्य है। यह पठन-पाठन के एक स्पष्ट और व्यवस्थित रूप की ओर बढ़ने का संकेत देता है जिसकी शिक्षक, शोधकर्ता और माता-पिता लंबे समय से मांग कर रहे थे।

न्यूज़ीलैंड को निश्चित रूप से अपनी साक्षरता दर बढ़ाने की आवश्यकता है। 15-वर्षीय बच्चों में से केवल 60 प्रतिशत ही पढ़ने के सबसे बुनियादी स्तर से ऊपर पहुंच पा रहे हैं, जिसका अर्थ है कि 40 प्रतिशत पढ़ने और लिखने के लिए संघर्ष कर रहे हैं।

शोध से पता चलता है कि साक्षरता में क्या काम होता है, इस पर ध्यान केंद्रित करना सुधार के लिए महत्वपूर्ण है।

कुछ स्कूलों ने पहले से ही विभिन्न प्रकार के संरचित साक्षरता कार्यक्रम लागू किए हैं, अकसर अपने दम पर।

शिक्षा मंत्रालय ने अधिक स्पष्ट पठन निर्देश के लिए संसाधन उपलब्ध कराना भी शुरू कर दिया है, और अपनी शिक्षा रणनीति में संरचित साक्षरता के तत्वों को शामिल किया है।

लेकिन यहीं पर हमें सावधानी से चलने और सहयोगात्मक ढंग से काम करने की जरूरत है।

स्पष्ट पठन अनुदेश की शुरूआत का समर्थन करने वाले अनुसंधान का एक बढ़ता हुआ समूह है - जो संरचित साक्षरता का समर्थन करता है। लेकिन हम अभी तक ठीक से नहीं जानते कि यह कैसा दिखेगा और इसे कैसे पढ़ाया जाएगा।

और, यदि हम अनुकूलनशील नहीं रहते हैं, तो हम एक ऐसे पठन पाठ्यक्रम का चयन कर सकते हैं जो साक्षरता दर बढ़ाने के वादे को विफल कर सकता है।

पढ़ना कैसे सिखाया गया है?

दशकों से, न्यूजीलैंड के स्कूलों ने ‘‘संतुलित साक्षरता दृष्टिकोण’’ का पालन किया है। यह साहित्य में डूबे रहने और मौखिक के विकास को महत्व देता है। छात्रों को स्पष्ट रूप से शब्दों का उच्चारण करना नहीं सिखाया जाता है।

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