देश की खबरें | गैर स्थानीय मतदाताओं को शामिल करने का निर्णय मताधिकार का हनन : नेशनल कॉन्फ्रेंस

श्रीनगर, 18 अगस्त नेशनल कॉन्फ्रेंस ने जम्मू कश्मीर की मतदाता सूची में बाहरी मतदाताओं को शामिल करने के फैसले को भूतपूर्व राज्य के लोगों के ‘मताधिकार का हनन’ करार देते हुए कहा कि किसी भी बाहरी व्यक्ति को सिर्फ इसलिए मतदान करने की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए कि वे यहां अस्थायी रूप से रहने आए हैं।

नेशनल कॉन्फ्रेंस के मुख्य प्रवक्ता तनवीर सादिक ने संवाददाताओं से कहा, ‘‘मुख्य निर्वाचन अधिकारी (सीईओ) ने क्या कहा है, इस पर कोई स्पष्टता नहीं है। सामान्य रूप से रहने वाले किसी नागरिक की योग्यता क्या है? क्या पर्यटकों सहित कोई भी यहां अपना वोट दर्ज करा सकता है?’’

उन्होंने कहा कि लोगों में आशंकाएं हैं और सरकार को स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए। सादिक ने कहा, ‘‘महत्वपूर्ण बात यह है कि देश में ऐसे कई राज्य हैं जहां अभी चुनाव नहीं हुए हैं। वे राज्य अपने लोगों को यहां भेज सकते हैं, वे खुद को मतदाता के रूप में पंजीकृत कर सकते हैं, फिर मतदान कर सकते हैं और फिर यहां अपना पंजीकरण रद्द कर सकते हैं, जिसके बाद वे फिर से अपने राज्यों में अपना पंजीकरण करा लेंगे।’’

उन्होंने कहा, ‘‘लोगों के मन में यह आशंका है क्योंकि स्पष्टता नहीं है...अंदेशा है कि यह सब एक योजना के तहत किया जा रहा है।’’

सादिक की प्रतिक्रिया ऐसे वक्त आई है, जब मुख्य निर्वाचन अधिकारी हृदेश कुमार ने घोषणा की है कि अनुच्छेद 370 के निरस्त होने के बाद पहली बार मतदाता सूची के विशेष पुनरीक्षण के बाद केंद्र शासित प्रदेश में बाहरी लोगों सहित लगभग 25 लाख अतिरिक्त मतदाता होने की संभावना है।

नेशनल कॉन्फ्रेंस के मुख्य प्रवक्ता ने कहा कि जम्मू कश्मीर के लोगों को वोट देने का अधिकार केवल इसलिए दिया जाना चाहिए क्योंकि वे स्थानीय हैं, और ‘‘किसी बाहरी व्यक्ति को सिर्फ इसलिए वोट देने की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए क्योंकि वह यहां अस्थायी रूप से आया है।’’

सुरक्षा बलों के जवानों द्वारा खुद को मतदाता के रूप में पंजीकृत कराने के मुद्दे का जिक्र करते हुए सादिक ने कहा कि नियमों के मुताबिक सुरक्षा बल शांतिपूर्ण सैन्य स्थलों में ही मतदाता के तौर पर पंजीकरण करा सकते हैं। उन्होंने सवाल किया, ‘‘जम्मू कश्मीर में सशस्त्र बल विशेष अधिकार कानून (आफ्स्पा) लागू है, जिसका अर्थ है कि जम्मू कश्मीर को अशांत राज्य घोषित किया गया है...इसलिए यह शांति वाला स्थान नहीं है ऐसे में सुरक्षा बल यहां स्थानीय मतदाता के तौर पर कैसे पंजीकरण करा सकते हैं।’’

उन्होंने कहा कि सीईओ का बयान जम्मू कश्मीर के लोगों के मताधिकार पर कुठाराघात की तरह है। सादिक ने कहा, ‘‘पंजाब के लोग आसानी से जम्मू आ सकते हैं। जम्मू संभाग के किसी जिले में करीब 8,000-10,000 बाहरी मजदूर हैं। ऐसे में, सीईओ के अनुसार, वे सभी मतदाता बन सकते हैं। उस मामले में, आप जम्मू-कश्मीर के लोगों के मताधिकार का हनन कर रहे हैं।’’

सीईओ के बयान के बाद आतंकवादी समूहों द्वारा धमकी दिए जाने पर नेशनल कॉन्फ्रेंस के नेता ने कहा कि बाहरी लोगों की सुरक्षा भी एक महत्वपूर्ण मुद्दा है।

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