नयी दिल्ली, 27 मई दिल्ली उच्च न्यायालय ने सोमवार को प्रोफेसर इकबाल हुसैन की उस अपील को 29 मई को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया, जिसमें उन्होंने जामिया मिल्लिया इस्लामिया के उप कुलपति और बाद में कार्यवाहक कुलपति के रूप में उनकी नियुक्ति को रद्द करने के एकल न्यायाधीश के आदेश को चुनौती दी है।
अपील पर सुनवाई तब टाल दी गई, जब खंडपीठ की अध्यक्षता कर रहीं न्यायमूर्ति रेखा पल्ली ने खुद को सुनवाई से अलग कर लिया और निर्देश दिया कि मामले को बुधवार को दूसरी पीठ के समक्ष सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया जाए। इस पीठ में न्यायमूर्ति सौरभ बनर्जी भी शामिल थे।
बाइस मई को, उच्च न्यायालय की एकल न्यायाधीश की पीठ ने मोहम्मद शामी अहमद अंसारी और अन्य की याचिकाओं की सुनवाई करते हुए हुसैन को उप कुलपति (प्रो-वाइस चांसलर) बनाये जाने तथा बाद में विश्वविद्यालय के कार्यवाहक कुलपति के तौर पर नियुक्ति को यह कहते हुए रद्द कर दिया था कि नियुक्तियां संबंधित कानून के अनुरूप नहीं की गई थीं।
एकल पीठ ने हालांकि, यह सुनिश्चित करने का निर्देश दिया था कि विश्वविद्यालय की शैक्षणिक और प्रशासनिक गतिविधियों को प्रभावित होने या पूरी तरह से ठप होने से बचाने के लिए कार्यवाहक कुलपति के पद पर एक सप्ताह के भीतर नयी नियुक्ति की जाए।
अदालत ने जामिया विश्वविद्यालय के 'विजिटर' (राष्ट्रपति) को एक नियमित कुलपति की नियुक्ति की प्रक्रिया शुरू करने का आदेश जारी करने को भी कहा था।
तत्कालीन कुलपति प्रोफेसर नजमा अख्तर ने 14 सितंबर, 2023 को हुसैन को जामिया मिल्लिया इस्लामिया का उप कुलपति नियुक्त किया था। इसके बाद, 12 नवंबर, 2023 को अख्तर की सेवानिवृत्ति पर हुसैन के कार्यवाहक कुलपति का कार्यभार संभालने के बारे में रजिस्ट्रार के कार्यालय द्वारा एक अधिसूचना जारी की गई।
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